‘पैलेट गन चलाने का क्या नियम है?’ सुप्रीम कोर्ट सख्त, याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से मांगा जवाब

'पैलेट गन चलाने का क्या नियम है?' सुप्रीम कोर्ट सख्त, याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से मांगा जवाब

जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने संकेत दिया कि इस मुद्दे का समाधान केवल पूर्ण प्रतिबंध नहीं, बल्कि इसके इस्तेमाल के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करना भी हो सकता है.

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि चिंता पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है, तो अदालत से इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग करने के बजाय इसके उपयोग के लिए एक स्पष्ट और सख्त प्रोटोकॉल बनाने की मांग की जा सकती है. अदालत की टिप्पणी से संकेत मिला कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है.

सरकार का पक्ष- शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस पर सरकार का कोई विवाद नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई मौके की परिस्थितियों पर निर्भर करती है. उन्होंने अदालत से कहा कि कई बार घटनास्थल पर हालात तेजी से बदलते हैं और ऐसे समय में पुलिस को तत्काल निर्णय लेने पड़ते हैं. इसलिए किसी भी कार्रवाई का आकलन उस समय की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.

याचिका में संशोधन की मिली अनुमति

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में संशोधन की अनुमति मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए संशोधित याचिका दाखिल करने की इजाजत दे दी.

घायलों के इलाज का दिया निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कि जिन लोगों को इस घटना में चोटें आई हैं, उन्हें उचित और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए. अदालत ने स्पष्ट किया कि घायलों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए.

आगे की सुनवाई पर रहेगी नजर

अब संशोधित याचिका दाखिल होने के बाद मामले की आगे की सुनवाई होगी. इस दौरान अदालत पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर संभावित दिशानिर्देश, पुलिस की जवाबदेही और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार कर सकती है.


[

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*