तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने एक आपराधिक मामले में पुलिस के सामने वर्चुअली (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) पेश होने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया है.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाईं, तो राजनीति में कदम रखने वाले नेता अंडों के हमले से क्यों डर रहे हैं?
दरअसल, महुआ मोइत्रा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में एक एफआईआर दर्ज की गई है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी (IO) के सामने पेश होने का निर्देश दिया था और साथ ही पुलिस को आदेश दिया था कि इस दौरान उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए व प्रदर्शनकारियों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
इस मामले में महुआ मोइत्रा ने सुरक्षा कारणों और पूर्व में हुए विरोध प्रदर्शनों (अंडे फेंके जाने) का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने मांग की थी कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से जाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी जाए. महुआ मोइत्रा की तरफ से कहा गया था, ‘पुलिस के नोटिस के मुताबिक मुझे अपने निर्वाचन क्षेत्र के थाने में पेश होना है, पिछली बार जब मैं वहां गई थी तो दो बातें हुई थीं. पहले मुझे धमकियां मिलीं कि (मुझ पर) अंडे फेंके जाएंगे आदि और दूसरी बार, वास्तव में अंडे फेंके गए.’
‘इस तरह के मामलों को सुप्रीम कोर्ट तक लाना ही नहीं चाहिए‘
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. महुआ मोइत्रा के वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा ‘वकील ने दलील दी कि कानून के तहत महिलाओं को जांच के लिए अपने निवास स्थान के अलावा किसी अन्य स्थान पर जाने के लिए बाध्य न करने का अधिकार है. उन्होंने बताया कि पिछली बार जब सांसद अपने क्षेत्र के थाने गई थीं, तो उन पर अंडे फेंके गए थे और इस बार भी ऐसे हमले होने की आशंका है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पूछा, “वर्चुअली क्यों? सिर्फ इसलिए कि आप एक सांसद हैं?” उन्होंने आगे कहा, “जब आपने राजनीति में कदम रख ही लिया है, तो फिर अंडों से क्यों डरती हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो अपने सीने पर गोलियां खाई थीं. इस तरह के मामलों को सुप्रीम कोर्ट तक लाना ही नहीं चाहिए.”
याचिका ली वापस
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और राहत देने से इनकार के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अपनी याचिका वापस ले ली. इसके बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया, अब महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशानुसार 14 अगस्त को खुद पुलिस अधिकारी के सामने पेश होना होगा.
Bureau Report
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