मानसून सत्र के तीन हफ्ते विपक्ष की हंगामे के भेंट चढ़ गए. संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेजाबाजी की, जिसके बाद सदन को सोमवार तक लिए स्थगित किया गया है. इस बीच शुक्रवार (07 अगस्त) को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
दरअसल, सदन में विपक्ष के नेता खरगे ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सदन में आकर बयान देने की मांग की. उन्होंने कहा कि सभापति की बात का भी सम्मान नहीं किया जा रहा है. खरगे के इस बयान पर किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई और कहा कि विपक्ष तय नहीं करेगा कि किस विषय पर कौन मंत्री सदन में जवाब देगा. इसके बाद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी.
विपक्ष की मांग क्या है?
विपक्ष की ओर से जंतर-मंतर में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल के उपयोग का विरोध किया जा रहा है. विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई को अनुचित तरीके से छात्रों पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया. इसी मामले में विपक्ष की ओर से गृह मंत्री से जवाब मांगा जा रहा है.
खरगे ने सदन में रखी ये मांग
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि गृह मंत्री को सदन में आना चाहिए. मुझे और कुछ नहीं कहना. हमने पहले भी यह बात कही थी कि गृह मंत्री सदन में आएं और सदन में आकर बयान दें.
उन्होंने आगे कहा कि सभापति ने विपक्ष की यह भावना संसदीय कार्यमंत्री तक पहुंचाई थी, लेकिन बावजूद इसके कोई एक्शन नहीं लिया गया. खरगे ने सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि आपने विपक्ष की भावना संसदीय कार्य मंत्री को बता दी थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ. आपकी बात को भी मर्यादा नहीं दी जा रही है. यह सदन का अपमान है.
खरगे पर रिजिजू बरसे
खरगे के इसी बयान पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई और सरकार का पक्ष रखा. रिजिजू ने कहा कि संसदीय व्यवस्था में यह स्पष्ट नियम है कि जिस विषय से संबंधित मंत्रालय होता है, उसी मंत्रालय को सदन में जवाब देना होता है. उन्होंने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किस मुद्दे पर कौन मंत्री सदन में उपस्थित होगा.
देर रात तक यहीं रहते हैं गृह मंत्री
रिजिजू ने कहा कि गृहमंत्री सुबह से देर रात तक संसद परिसर में मौजूद रहते हैं, लेकिन सदन में जिस विषय से संबंधित मंत्रालय होता है, उसी मंत्री की जिम्मेदारी होती है कि वह जवाब दे. विपक्ष यह तय नहीं करेगा कि किस विषय पर कौन मंत्री सदन में आएगा. यह अधिकार विपक्ष का नहीं है और ऐसी परंपरा नहीं है.
‘सभापति ने निर्देश नहीं दिया’
किरेन रिजिजू की ओर से कहा गया कि सभापति ने केवल विपक्ष की मांग सरकार तक पहुंचाई थी, कोई निर्देश नहीं दिया था. वहीं, किरेन रिजिजू की ओर से आरोप लगाए गए कि विपक्ष के सांसद सदन में हंगामा करने के बाद यहां से चले जाते हैं, जबकि गृह मंत्री सुबह से लेकर देर रात तक संसद में मौजूद रहते हैं.
Bureau Report
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