किसी पुराने जेल परिसर को होटल में बदलने का आइडिया अपने आप में काफी अलग है. लेकिन जापान ने अपनी ऐतिहासिक इमारत को तोड़ने के बजाय उसे एक नई पहचान देने का फैसला किया. नारा शहर की पुरानी नारा प्रिजन अब होशिनोया नारा प्रिजन रिजॉर्ट के नाम से लोगों को ठहरने का नया अनुभव दे रही है.
इस होटल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. बाहर से देखने पर यह बिल्डिंग अब भी अपने पुराने जेल वाले अंदाज को काफी हद तक संभाले हुए है. लेकिन अंदर कदम रखते ही पुराने सेल्स में मॉर्डन फर्नीचर, आरामदायक बेड और लग्जरी सुविधाएं नजर आती हैं.
जहां कभी कैदी बंद थे, वहां अब बने हैं सुइट्स
इस होटल की सबसे दिलचस्प बात इसके कमरे हैं. यहां कमरों को किसी नई बिल्डिंग में तैयार नहीं किया गया, बल्कि पुराने जेल सेल्स की संरचना का ही इस्तेमाल किया गया है. पुराने कमरों को आपस में जोड़कर बड़े और आरामदायक सुइट्स बनाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, होटल में कुल 48 सुइट्स हैं. इन कमरों में पुरानी लाल ईंटों वाली दीवारों और जेल की मूल वास्तुकला को काफी हद तक बचाकर रखा गया है. दूसरी तरफ लकड़ी, मॉर्डन फर्नीचर और आज के समय की जरूरी सुविधाएं जोड़कर इन्हें लग्जरी होटल जैसा रूप दिया गया है. मतलब यहां ठहरने वाला व्यक्ति एक तरफ इतिहास को महसूस करता है, तो दूसरी तरफ उसे किसी महंगे होटल जैसी सुविधाएं मिलती हैं.
पुरानी लाल ईंटों को जानबूझकर नहीं छिपाया गया
होटल की डिजाइन को खास बनाने के लिए पुरानी इमारत की पहचान को मिटाया नहीं गया. लाल ईंटों वाली दीवारें, छत की पुरानी डिजाइन और जेल की मूल बनावट को सजावट का हिस्सा बनाया गया है. होटल के सुइट्स में अलग-अलग तरह की सुविधाएं दी गई हैं. इनमें 11 सेल डिलक्स सुइट्स भी शामिल हैं, जहां मेहमानों को अलग ड्रेसिंग लाउंज और बड़ा लिविंग स्पेस मिलता है. इस तरह पुराने जेल सेल को सिर्फ कमरे की तरह इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि उसकी कहानी को भी होटल के एक्सपीरियंस का हिस्सा बनाया गया है.
1908 में तैयार हुई थी नारा प्रिजन
जिस बिल्डिंग में आज यह लग्जरी होटल है, उसका इतिहास एक सदी से भी ज्यादा पुराना है. नारा प्रिजन का निर्माण 1901 में शुरू हुआ था और 1908 में इसे पूरा किया गया. यह जापान के मेजी दौर में बनाई गई पांच प्रमुख जेलों में शामिल थी. इसकी इमारत अपनी खास आर्किटेक्चर के लिए भी जानी जाती है. परिसर के बीच में एक सेंट्रल गार्डहाउस बनाया गया था और वहां से जेल की अलग-अलग इमारतें पंखे या तारे की तरह कई दिशाओं में फैली हुई थीं. लाल ईंटों से बनी यह इमारत आज भी उस दौर की वास्तुकला की झलक दिखाती है. यही वजह है कि बाद में इसे जापान की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संपत्तियों में शामिल किया गया.
सात साल तक चला पुराने जेल को होटल बनाने का काम
इतनी पुरानी जेल को सीधे लग्जरी होटल में बदल देना आसान नहीं था. इसके लिए करीब सात साल तक काम किया गया. इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि होटल को आधुनिक बनाया जाए, लेकिन इमारत का ऐतिहासिक रूप खराब न हो. इसी वजह से पुरानी ईंटों, छत और बिल्डिंग की मूल संरचना को बचाने पर खास ध्यान दिया गया. यानी जहां जरूरत थी, वहां नई सुविधाएं जोड़ी गईं, लेकिन इमारत की पुरानी पहचान को पूरी तरह बदलने से बचा गया. इसके साथ ही यहां नारा प्रिजन म्यूजियम भी बनाया गया है. इसमें इस जगह के इतिहास और जेल के पुराने दौर से जुड़ी जानकारी लोगों को दी जाती है.
एक रात ठहरने के लिए करीब 1 लाख रुपये
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस ऐतिहासिक जेल में ठहरने के लिए कितना पैसा खर्च करना होगा? होटल की वेबसाइट के मुताबिक, कमरे की शुरुआती कीमत करीब 1,47,000 जापानी येन प्रति रात है. टैक्स और सर्विस चार्ज इसमें शामिल हैं, जबकि खाना अलग से लिया जाता है. भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम करीब एक लाख रुपये प्रति रात के आसपास बैठती है. जाहिर है, यह आम बजट वाले टूरिस्ट के लिए सस्ता होटल नहीं है. लेकिन यहां आने वाले मेहमान सिर्फ एक कमरे के लिए पैसे नहीं दे रहे. उन्हें एक ऐतिहासिक इमारत के अंदर रहने का अलग एक्सपीरियंस भी मिल रहा है.
जेल की दीवारों के पीछे अब कैद नहीं, सुकून है
नारा प्रिजन की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि इस जगह का मतलब समय के साथ पूरी तरह बदल गया. कभी इन दीवारों के पीछे रहने वाले लोग अपनी मर्जी से बाहर नहीं निकल सकते थे. आज लोग इन्हीं दीवारों के अंदर रहने के लिए अपनी मर्जी से पैसे खर्च कर रहे हैं. एक वक्त में जहां कैद, पहरा और सख्ती इस इमारत की पहचान थी, वहीं आज यहां सुकून, डिजाइन और लग्जरी का माहौल है. यही बदलाव नारा प्रिजन को बाकी होटलों से अलग बनाता है. यह सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि इतिहास के बीच एक रात बिताने का ऐसा अनुभव है, जिसे लोग शायद लंबे समय तक याद रखना चाहेंगे.
Bureau Report
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