बच्चों को फोन से दूर रखने के लिए पैरंट्स तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. कोई स्क्रीन टाइम कम करता है तो कोई मोबाइल छीन लेता है. लेकिन चीन के एक ब्लॉगर ने इस समस्या का ऐसा मजेदार तरीका निकाला, जिसे देखकर बच्चे भी हैरान रह जाते हैं और पैरंट्स भी खूब हंसते हैं.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हेनान प्रांत के 39 साल के यान झेंगजुन सोशल मीडिया पर ‘अंकल ए जून’ के नाम से मशहूर हैं. वह पुराने कपड़े पहनकर, एक ठेला और हाथ में लाउडस्पीकर लेकर गली-मोहल्लों में घूमते दिखाई देते हैं. उनका अंदाज बिल्कुल किसी कबाड़ी वाले जैसा होता है. फर्क सिर्फ इतना है कि वह पुराने सामान के बजाय शरारती बच्चों को ‘रीसाइकिल’ करने का ऐलान करते हैं.
‘फोन गेम खेलने वाला बच्चा है तो दे दीजिए’
यान के वीडियो में वह लाउडस्पीकर पर मजेदार अंदाज में बच्चों के बारे में ऐलान करते हैं. अगर कोई बच्चा लगातार फोन गेम खेलता है, खाना नहीं खाता, दांत साफ नहीं करता या पैरंट्स की बात नहीं मानता, तो उसे ‘रीसाइकिल’ के लिए भेजने की बात कही जाती है. यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन कई चीनी पैरंट्स के लिए यह तरीका बच्चों को कुछ देर के लिए फोन से दूर करने का मजेदार हथियार बन गया है. कुछ पैरंट्स बच्चों को यान के वीडियो दिखाकर कहते हैं कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो ‘अंकल ए जून’ उन्हें लेने आ जाएंगे.
एक दोस्त की शिकायत से शुरू हुआ आइडिया
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट में बताया गया है कि यान ने यह काम किसी बड़ी प्लानिंग के साथ शुरू नहीं किया था. इसकी शुरुआत एक दोस्त की परेशानी से हुई. उनके दोस्त का बच्चा अक्सर जिद करता था और बात नहीं मानता था. इसी दौरान मजाक में दोस्त ने कहा कि काश कोई कुछ दिनों के लिए बच्चे को अपने साथ ले जाए और उसे समझा दे. यान को यही आइडिया पसंद आ गया. उन्होंने पुराने स्टाइल का ओवरकोट पहना, एक रेहड़ी ली और लाउडस्पीकर लेकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया. उनके किरदार में कबाड़ी वाले की झलक थी, लेकिन ‘सामान’ की जगह उनके ऐलान का टारगेट शरारती बच्चे बन गए. शुरुआत में यह सिर्फ मजाक था, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से पसंद किए जाने लगे.
16 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स, पैरंट्स भेजते हैं शिकायतें
यान के ‘अंकल ए जून’ वाले वीडियो इतने पॉपुलर हुए कि उनके करीब 16 लाख फॉलोअर्स हो गए. पैरंट्स कमेंट सेक्शन में अपने बच्चों की शिकायतें लिखने लगे. कोई बताता कि बच्चा पूरे दिन मोबाइल गेम खेलता है, तो कोई कहता कि उसका बच्चा खाना खाने के समय भी फोन नहीं छोड़ता. कुछ पैरंट्स तो यान से अपने बच्चे के लिए खास ‘रीसाइक्लिंग वीडियो’ बनाने की मांग भी करने लगे. इसके बाद यान ने अलग-अलग तरह की बच्चों की आदतों को लेकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया.
पैरंट्स को मिला मजेदार तरीका, लेकिन बहस भी शुरू
यान के वीडियो जब पॉपुलर होने शुरू हुए तो कुछ लोगों ने इसकी आलोचना करनी भी शुरू कर दी. कई पैरंट्स को यह तरीका मजेदार और काम का लगा, लेकिन कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि बच्चों को डराकर उनकी आदतें बदलना सही तरीका है या नहीं. चिंता खासतौर पर बच्चों की मेंटल हेल्थ को लेकर जताई गई. लोगों का कहना था कि छोटी उम्र में किसी बच्चे को बार-बार यह डर दिखाना कि उसे कोई ‘ले जाएगा’ या ‘रीसाइकिल’ कर देगा, उसके मन पर असर डाल सकता है. यही वजह है कि यान के कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी शुरू हो गई. कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर उनके वीडियो की रीच भी कम हुई, जिसके बाद उन्होंने कुछ वक्त तक ऐसे वीडियो बनाना रोक दिया.
टीचर ने भी बताया, डर नहीं समझाना जरूरी
सिचुआन प्रांत की एक प्राइमरी स्कूल टीचर ने इस ट्रेंड को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि ऐसे वीडियो कुछ समय के लिए पैरंट्स को राहत दे सकते हैं. बच्चे डरकर फोन छोड़ भी दें, लेकिन यह तरीका पैरंट्स की जिम्मेदारी का ऑप्शन नहीं बन सकता. उनके मुताबिक, बच्चों की आदतों में बदलाव के लिए उन्हें प्यार से समझाना, नियम बनाना और खुद भी उन नियमों का पालन करना ज्यादा जरूरी है. खासकर मोबाइल की आदत छुड़ाने के लिए सिर्फ फोन छीनने के बजाय बच्चों को दूसरी एक्टिविटीज में व्यस्त रखना ज्यादा असरदार हो सकता है.
अब डराने के बजाय पॉजिटिव वीडियो बना रहे यान
दिलचस्प बात यह है कि यान ने समय के साथ अपने कंटेंट का तरीका भी बदला है. उनका कहना है कि वह इस अकाउंट से कमाई नहीं करते और न ही विज्ञापन बेचते हैं. ‘अंकल ए जून’ का काम उनके लिए एक पार्ट टाइम एक्टिविटी है. उनके पुराने वीडियो से डरने वाले कुछ बच्चे अब बड़े हो चुके हैं. उन्हें समझ आ गया है कि वह सब सिर्फ एक एंटरटेनमेंट कैरेक्टर था. यान भी अब बच्चों को सिर्फ डराने के बजाय पॉजिटिव मैसेज देने वाले वीडियो बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. ऐसे वीडियो में वह बच्चों को इंजेक्शन लगवाने जैसी मुश्किल परिस्थितियों में रोने या डरने की इजाजत देते दिखाई देते हैं. उनका मैसेज है कि बच्चों का डर गलत नहीं है और हर बार उन्हें डराकर चुप कराना जरूरी नहीं.
बच्चों को समझाने का तरीका भी बदलना होगा
‘अंकल ए जून’ की कहानी भले ही मजेदार हो, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर सवाल भी छिपा है. आज बच्चों का स्क्रीन टाइम और फोन की आदत दुनिया भर के पैरंट्स के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है. ऐसे में कोई भी आसान और मजेदार तरीका तुरंत पॉपुलर हो जाता है. हालांकि, बच्चे को कुछ देर के लिए डराकर फोन छुड़ाना और लंबे समय के लिए उसकी आदत बदलना दो अलग बातें हैं. यान के वीडियो मनोरंजन के तौर पर लोगों को पसंद आ सकते हैं, लेकिन बच्चों की परवरिश में प्यार, बातचीत और सही लिमिट तय करना ज्यादा जरूरी है.
Bureau Report
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