Awarapan 2 Review: दर्द, मोहब्बत और बदला… एक बार फिर इमरान हाशमी का वो सालों पुराना अंदाज छू जाएगा दिल; ताजा हो जाएंगी पुरानी यादें

Awarapan 2 Review: दर्द, मोहब्बत और बदला... एक बार फिर इमरान हाशमी का वो सालों पुराना अंदाज छू जाएगा दिल; ताजा हो जाएंगी पुरानी यादें

फिल्म: आवारापन 2
कलाकार: इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आजमी, पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली
निर्देशक: नितिन कक्कड़
रनटाइम: 140 मिनट
रेटिंग: 3.5 स्टार्स 

कुछ फिल्में सिर्फ कहानियां नहीं होतीं, वो अपने साथ एक एहसास लेकर आती हैं. 19 साल पहले 2007 की ‘आवारापन’ भी ऐसी ही फिल्म थी और करीब दो दशक बाद आई ‘आवारापन 2’ उसी एहसास को आगे बढ़ाने की कोशिश करती है. हालांकि, इस फिल्म को देखने से पहले पहली ‘आवारापन’ देख लेना बेहतर होगा, क्योंकि सीक्वल की कहानी सीधे वहीं से आगे बढ़ती है. पुराने किरदारों और घटनाओं को समझने में आसानी होगी.

इमरान हाशमी के फैंस काफी लंबे समय से इस फिल्म के रिलीज होने का वेट कर रहे थे, जो आज खत्म हो चुका है. इस बार फिल्म की कहानी और इसमें नजर आने वाले कई चेहरे एकदम नए हैं. इसके बावजूद, पर्दे पर इमरान का वही पुराना और जाना-पहचाना अंदाज लोगों को एक बार फिर उन्हीं पुरानी यादों में ले जाने के लिए बिल्कुल तैयार है. फिल्म के खूबसूरत गाने एक बार फिर लोगों के दिलों के साथ-साथ उनकी प्लेलिस्ट का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं. 

पहली कहानी से कनेक्टेड है स्टोरी

फिल्म की शुरुआत पहले पार्ट के बाद के घटनाक्रम से होती है और फ्लैशबैक की मदद से पिछली कहानी को भी समेटा जाता है. शिवम पंडित अब पहले जैसा इंसान नहीं रहा, लेकिन आलिया के लिए उसका प्यार आज भी जिंदा है. एक दिन आलिया की कब्र पर पहुंचा शिवम एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनता है. वो बच्ची को एक अनाथालय में छोड़ देता है और उसका नाम आलिया रखता है. शिवम उस बच्ची और अनाथालय से जुड़ा रहता है. कहानी तब करवट लेती है, जब आलिया को गोद लेने वाला एक कपल सामने आता है और बाद में शिवम को पता चलता है कि वो बच्ची ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार हो गई है. इसके बाद शिवम किस हद तक जाता है, यही फिल्म का सबसे बड़ा अट्रैक्शन है. 

बेहतरीन डायरेक्शन

नितिन कक्कड़ का डायरेक्शन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है. इसके स्क्रीनप्ले में इमोशंस और कहानी की रफ्तार का बहुत ही शानदार तालमेल देखने को मिलता है. अगर पिछली फिल्म से तुलना करें तो इस बार के डायलॉग्स काफी डीप हैं, जो ऑडियंस को गहराई से सोचने पर मजबूर कर देते हैं. फिल्म में वीएफएक्स (VFX) का इस्तेमाल बेहद लिमिटेड रखा गया है, लेकिन जहां भी इसकी जरूरत पड़ी है, वहां ये बहुत असरदार साबित होता है. हालांकि, अगर फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई होती, तो सिनेमाघर में इसका एक्सपीरियंस और भी ज्यादा दमदार हो सकता था.

फिल्म की जान है म्यूजिक

इमरान हाशमी की फिल्म हो और उसके गाने लोगों के दिलों को न छुएं, ऐसा होना तो लगभग नामुमकिन सा लगता है. पुरानी फिल्मों की शानदार परंपरा को कायम रखते हुए, इस बार भी म्यूजिक ‘आवारापन 2’ की असली जान बनकर उभरा है. इस फिल्म के गाने सिर्फ म्यूजिक लिस्ट में सुने जाने वाले ट्रैक नहीं हैं, बल्कि ये कहानी की परतों और किरदारों के इमोशन के साथ एकदम गहराई से जुड़े हुए हैं. जब ये म्यूजिक बड़े पर्दे पर बजता है, तो कहानी का असर दोगुना हो जाता है. संगीत का यही खूबसूरत तालमेल ऑडियंस को इमोशनली फिल्म से पूरी तरह जोड़ देता है.

इमरान हाशमी का जलवा​

इमरान हाशमी इस बार भी शिवम पंडित के किरदार में एक बार फिर साबित करते हैं कि इंटेंस किरदारों पर उनकी पकड़ आज भी जबरदस्त है. लंबे बाल, इमोशनल आंखें और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस… इमरान हर फ्रेम में छाए रहते हैं. उनका अभिनय फिल्म को उठाकर दूसरे लेवल पर ले जाता है. शबाना आजमी कम स्क्रीन टाइम में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं, जबकि पूरन गब्बी अपने किरदार की बॉडी लैंग्वेज और अंदाज से इंप्रेस करते हैं. दिशा पाटनी भी सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं रहतीं और अपने किरदार में अच्छी लगती हैं. 

क्यों देखें मूवी?

कुल मिलाकर ‘आवारापन 2’ एक इमोशनल और नॉस्टेल्जिक सीक्वल है, जो पहली फिल्म की यादों को रिमाइंड कराते हुए अपनी कहानी भी कहता है. प्यार, इंसानियत और रिश्तों का मैसेज देने वाली ये फिल्म बिना किसी झिझक के पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती है. अगर आप इस वीकेंड अपने परिवार, दोस्तों या गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड के साथ फिल्म देखना का प्लान कर रहे हैं तो ये फिल्म आपके लिए अच्छा ऑप्शन साबित हो सकती है, जो आपको शुरुआत से लेकर आखिर तक खुद से जोड़े रखती है.

Bureau Report

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