Indian Railways: एयरपोर्ट जैसे होंगे रेलवे स्टेशन! लेकिन कौन होगा मालिक? समझिए PPP मॉडल में कैसे होता है काम

Indian Railways: एयरपोर्ट जैसे होंगे रेलवे स्टेशन! लेकिन कौन होगा मालिक? समझिए PPP मॉडल में कैसे होता है काम

रेलवे म‍िन‍िस्‍ट्री की तरफ से यात्री सुव‍िधाओं पर लगातार काम क‍िया जा रहा है. सरकार की कोश‍िश देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न और वर्ल्‍ड क्‍लास लेवल का बनाने की है. इसी द‍िशा में केंद्र की तरफ से बड़ा कदम उठाया गया है. एनसीआर के तीन रेलवे स्टेशन पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार टर्मिनल समेत कुल 15 बड़े स्टेशन को आधुन‍िक बनाने की तैयारी है. इन स्टेशनों का डेवलपमेंट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत किया जाना है. ऐसे में सवाल यह है क‍ि आख‍िर पीपीपी मॉडल क्‍या है? स्‍टेशन का माल‍िक कौन होगा और इसमें क‍िस तरह काम होता है? आइए व‍िस्‍तार से समझते हैं-

आख‍िर क्‍या है पीपीपी मॉडल?

रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्णव ने राज्‍य सभा में एक सवाल के जवाब में जानकारी दी क‍ि रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए म‍िन‍िस्‍ट्री की तरफ से कई मॉडल पर विचार किया गया. लेक‍िन इसमें से पीपीपी मॉडल सबसे प्रभावी साबित हो रहा है. पीपीपी यानी पब्‍ल‍िक प्राइवेट पार्टनरश‍िप का मतलब है सरकार और प्राइवेट सेक्‍टर दोनों की पार्टनरश‍िप. लेक‍िन इसका मतलब यह भी नहीं हुआ क‍ि सरकार रेलवे स्टेशन को किसी प्राइवेट कंपनी को बेच देती है.

कमर्श‍ियल एक्‍ट‍िव‍िटी से होती है कमाई!

इसमें किसी स्टेशन के री-डेवलपमेंट, कंस्‍ट्रक्‍शन, ऑपरेशन या कुछ कमर्श‍ियल एक्‍ट‍िव‍िटी के लिए प्राइवेट कंपनी को तय शर्तों और टेन्‍योर के साथ जिम्मेदारी दी जाती है. इसमें कंपनी को स्‍टेशन की मेंटेनेंस रेलवे के तय स्‍टैडर्ड के ह‍िसाब से करनी होती है. आसान भाषा में यह कह सकते हैं क‍ि सरकार / रेलवे जमीन और पब्‍ल‍िक बेस‍िक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से जुड़ी व्यवस्था मुहैया कराती है. कंपनी इन्‍वेस्‍टमेंट और कंस्‍ट्रक्‍शन करती है. न‍िवेश क‍िये गए पैसे के बदले कंपनी को कमर्श‍ियल एक्‍ट‍िव‍िटी के जर‍िये कमाई करने का मौका म‍िलता है.

क्या स्टेशन प्राइवेट कंपनी को बेच द‍िये जाएंगे?

कुछ लोग इस तरह की बात सोच रहे हैं लेक‍िन ऐसा नहीं है. पीपीपी मॉडल स्टेशन की बिक्री से जुड़ा नहीं होता. रेलवे स्टेशन हर तरह के देश के रेलवे नेटवर्क का हिस्सा बना रहता है. प्राइवेट कंपनी को एक कॉन्‍ट्रैक्‍ट के तहत तय अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाती हैं. ट्रेन चलाना, ट्रैक, सिग्‍न‍िल‍िंग, और रेलवे ट्रैफ‍िक से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सभी सरकार के हाथ में रहता है.

कंपनी स्‍टेशन में पैसा क्‍यों लगाएगी?

कंपनी स्‍टेशन के डेवलपमेंट पर पैसा क्‍यों लगाएगी? आम आदमी के लि‍ए यही सबसे बड़ा सवाल रहता है. यद‍ि कोई कंपनी हजारों करोड़ रुपये का न‍िवेश स्टेशन के डेवलपमेंट पर करती है तो उसे बदले में क्या म‍िलेगा? इसका सीधा जवाब है कमर्शियल डेवलपमेंट. बड़े रेलवे स्टेशन शहर की बेहद अहम और व्‍यस्‍त स्‍थान पर होते हैं. रेलवे के पास स्टेशन के आसपास कमर्श‍ियल यूज करने की क्षमता होती है. रेलवे के रीडेवलपमेंट मॉडल में कमर्श‍ियल क्षमताओं को एक्‍सप्‍लोर करने की कोश‍िश रहती है. यानी स्टेशन महज ट्रेन से आवागमन की जगह नहीं रहेगा. यह ट्रांसपोर्ट के साथ ही कमर्शियल हब भी बन सकता है.

स्टेशन के अंदर क्या बदल सकता है?

रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉर‍िटी (RLDA) की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार केवल पुरानी स्‍टेशन ब‍िल्‍ड‍िंग को तोड़कर नया भवन बनाना नहीं है.इसका मकसद पूरे स्टेशन के पैसेंजर एक्‍सपीर‍ियंस को बदलना है. इसके तरह स्‍टेशन पर‍िसर में न‍िम्‍न‍िल‍िख‍ि बदलाव क‍िये जा सकते हैं-

  • बेहतर स‍िक्‍योर‍िटी स‍िस्‍टम
  • बड़ा और आधुनिक कॉनकोर्स
  • एस्केलेटर और लिफ्ट की सुव‍िधा
  • एयरपोर्ट की तरह पैसेंजर वेट‍िंग एरिया
  • दिव्यांग यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं
  • डिजिटल डिस्प्ले और पैसेंजर इंफारमेशन स‍िस्‍टम

शॉप‍िंग करने की सुव‍िधा

नए डेवलप होने वाले स्‍टेशन में टिकट काउंटर और प्लेटफॉर्म के अलावा तय कमर्श‍ियल स्‍पेस भी होगा. यह कमर्श‍ियल एर‍िया ब‍िल्‍कुल एयरपोर्ट की तरह होता है. भोपाल के रानी कमलापत‍ि स्‍टेशन पर भी इसी तरह की सुव‍िधाएं दी गई हैं. इस कमर्श‍ियल एर‍िया में-

  • रेस्टोरेंट
  • फूड कोर्ट
  • कैफे
  • रिटेल स्टोर
  • छोटी दुकानें
  • लाउंज
  • पार्किंग
  • यात्री सुविधा

से जुड़ी सर्व‍िस आद‍ि होती हैं. यानी स्टेशन धीरे-धीरे एक मल्टी-फंक्शनल अर्बन हब का रूप ले सकता है.

स्टेशन के बाहर का लुक भी बदलेगा

पीपीपी मॉडल के तहत रीडेवलपमेंट केवल स्टेशन की चार दीवारी के अंदर तक ही सीम‍ित नहीं होता. बड़े स्टेशन शहर के बीच में होते हैं. इसल‍िए स्टेशन से बाहर निकलते ही ट्रैफिक जाम, ऑटो-टैक्सी को लेकर परेशानी और पैदल यात्रियों को द‍िक्‍कत न हो. इसके लि‍ए प्‍लान‍िंग की जाती है. सड़क मार्ग, पार्किंग, बस, मेट्रो और ऑटो / टैक्सी स्‍टैंड को एक साथ जोड़ने की कोशिश रहती है. इसका मकसद रेलवे स्टेशन को केवल ट्रेन पकड़ने की जगह न रखकर शहर के अलग-अलग ट्रांसपोर्ट फैस‍िल‍िटी से जोड़ने वाले हब में बदलना है.

कंपनी को कहां से होगी कमाई?

यह बहुत बड़ा सवाल है क‍ि क्‍या प्राइवेट प्लेयर मुफ्त में यह सब क्यों करेगा? आपको बता दें स्टेशन की कमर्श‍िय एक्‍ट‍िव‍िटी उसके ल‍िए कमाई के मौके बनाती है. उदाहरण के लिए तय ह‍िस्‍से में दुकान, रेस्टोरेंट, ऑफिस स्पेस, पार्किंग और विज्ञापन आद‍ि से उसे कमाई होती है. पीपीपी मॉडल के तहत तैयार होने वाले रेलवे स्‍टेशन पर यात्र‍ियों को अभी म‍िलने वाली सभी सुव‍िधाएं मसलन बैठने की सीट, प्लेटफॉर्म, सामान्य यात्री सूचना आद‍ि फ्री में ही मुहैया होती हैं. लेक‍िन प्रीमियम लाउंज, पार्किंग, कमर्श‍ियल सर्व‍िस के ल‍िए चार्ज देना होता है.

सरकार का मकसद क्या है?

पीपीपी मॉडल पर देश के चुन‍िंदा रेलवे स्‍टेशन को डेवलप करने के पीछे सरकार का मकसद सरकारी निवेश के बोझ को कम करना है. देश में हजारों रेलवे स्टेशन हैं. हर बड़े स्टेशन को मॉर्डन बनाने के लिए बड़ा निवेश चाहिए.  इसके अलावा बड़े शहरों के बीच में रेलवे की जमीन बेहद मूल्यवान होती है. ऐसे में उसका उपयोग केवल पुराने स्टेशन भवन और सीमित सुविधाओं तक ही रहे तो उसकी आर्थ‍िक क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता. रीडेवलपमेंट के जरिये इस जमीन और स्‍टेशन एयर स्‍पेस का कमर्श‍ियल यूज हो सकता है. इसके अलावा इससे पैसेंजर एक्‍सपीरियंस में भी सुधार होता है.

ल‍िस्‍ट में कौन-कौन से स्‍टेशन?

  • पुरानी दिल्ली
  • हजरत निजामुद्दीन
  • आनंद विहार टर्मिनल
  • विजयवाड़ा
  • कोयंबटूर जंक्शन
  • केएसआर बेंगलुरु
  • चेन्‍नई सेंट्रल
  • अंधेरी
  • आवडी
  • तांबरम
  • भोपाल
  • वडोदरा
  • कल्याण
  • दादर
  • पुणे

क्‍या यात्र‍ियों पर कोई असर होगा?

क्‍या इसका यात्र‍ियों पर कोई असर होगा? अगर आपका भी कुछ ऐसा ही सवाल है तो बता दें पीपीपी मॉडल का मकसद स्टेशन के रीडेवलपमेंट और तय कमर्श‍ियल प्‍लान से जुड़ा है. आम आदमी से जुड़ी स्‍टेशन पर म‍िलने वाली क‍िसी भी सुव‍िधा के एवज में ज्‍यादा पैसा नहीं वसूला जाता. हालांकि, कुछ प्रीम‍ियम या कमर्श‍ियल सर्व‍िस के ल‍िए अलग चार्ज ल‍िया जा सकता है. यह संबंधित प्रोजेक्‍ट की शर्तों पर भी निर्भर करता है.

Bureau Report

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