आरबीआई अब कागज के नोट की बजाय प्लास्टिक के नोट चल में लाने वाला है. ये खबर तो आप पिछले कई महीने से सुन और पढ़ रहे हैं लेकिन ये नोट बाजार में कब आएंगे? इससे जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई थी. शायद आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर प्लास्टिक वाले नोट को आप कब खर्च कर पाएंगे? आपको बता दें देश में जल्द कागज वाले नोटों की जगह प्लास्टिक या पॉलिमर के नोट हाथ में नजर आने की उम्मीद है.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज एमपीसी के नतीजों का ऐलान करने के दौरान कहा कि प्लास्टिक के नोट का चलन अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत से चलन में आने की उम्मीद है. उनके बयान का यह मतलब निकाला जा रहा है कि अप्रैल से जून 2027 तक पॉलिमर नोट के बाजार में आने की संभावना है. इस दौरान आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी देते हुए रिजर्व बैं के गवर्नर ने बताया कि यह योजना फिलहाल ट्रायल में है. इसे बड़े पैमाने पर लागू करने का फैसला ट्रायल और उसके नतीजों के आधार पर लिया जाएगा.
हाथ में कब से आएंगे प्लास्टिक के नोट?
केंद्र की तरफ से आरबीआई को फील्ड ट्रायल के तौर पर 10 रुपये और 20 रुपये वाले एक-एक अरब यानी कुल 2 अरब पॉलिमर बैंक नोट छापने की मंजूरी दे दी गई है. फिलहाल कागज के नोटों को पूरी तरह बंद करने का किसी तरह का प्लान नहीं है. पॉलिमर और कागज दोनों तरह के नोट बाजार में साथ-साथ चलते रहेंगे. यदि सब कुछ तय प्लान के हिसाब से हुआ तो नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत से लोग प्लास्टिक के नोट से बाजार में खरीदारी कर पांएगे.
कागज के बजाय प्लास्टिक के नोट?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया प्लास्टिक नोट शुरू करने के पीछे दो कारण हैं. पहला कारण नोटों की ड्यूरेबिलिटी बढ़ाना है. सरकार का यह कदम छोटे नोट (10 और 20 रुपये वाले) के लिए काफी उपयोगी साबित होगा. दरअसल, इन नोटों का इस्तेमाल बहुत तेजी से होता है और तेजी से अदला-बदली के कारण जल्दी खराब हो जाते हैं. दुनिया के कई देशों में पिछले 30 साल से ज्यादा से पॉलिमर नोटों का यूज हो रहा है.
कितनी है पॉलिमर नोट की उम्र?
साधारण नोट के मुकाबले पॉलिमर नोट की उम्र दो से चार गुना ज्यादा होती है. इसके अलावा जैसे-जैसे देश की इकोनॉमी का साइज बढ़ रहा है, वैसे-वैसे नकदी की जरूरतें बढ़ रही हैं. इन नोटों को बड़े लेवल पर जारी करने से पहले भारतीय मौसम, यहां के माहौल और मौजूदा बैंकिंग स्ट्रक्चर में इनके प्रदर्शन की पूरी तरह से जांच की जाएगी.
फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की तैयारी
रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलिमर शीट की सप्लाई के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है. देश के अंदर प्लास्टिक नोटों की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि पिछले एक दशक में देश में करीब 50 अरब रुपये के फटे-पुराने नोटों को चलन से बाहर करना पड़ा है. हर साल नोटों की सुरक्षा और मेंटेंनेस पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. आंकड़ों के अनुसार FY 2016-17 के बाद से जारी किये गए हर 100 नए नोटों के मुकाबले 71 पुराने नोटों को हटाना पड़ा है.
Bureau Report
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