मध्य प्रदेश के नीमच में आंगनबाड़ियों और स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील पर स्वयं-सहायता समूहों की हड़ताल का असर पड़ा है. पिछले तीन महीनों से सरकार की ओर से मानदेय और राशि नहीं मिलने के कारण समूह की महिलाओं ने कामकाज बंद कर दिया है. स्थिति यह है कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के खाने का प्रबंध शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा निजी स्तर पर किया जा रहा है.
हाथ में बेलन और चकला लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाएं
नीमच जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर स्वयं-सहायता समूहों की महिलाओं ने बेलन और चकला लहराते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. अकेले नीमच जिले में ही लगभग 850 समूह और 22,000 रसोइए इस व्यवस्था से जुड़े हैं और भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. महिलाओं का कहना है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनकी आजीविका और जरूरी सामान खरीदने को लेकर बड़ा संकट पैदा हो गया है. उधार पर राशन खरीदने के कारण वे कर्ज के जाल में और गहरे धंसती जा रही हैं, और अब दुकानदारों ने और उधार देने से मना कर दिया है.
मांगें पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान
भोलियावास नीमच के शासकीय माध्यमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है, जहां महिला टीचरों और हेल्पर्स ने बच्चों के खाने-पीने का किसी तरह वैकल्पिक इंतजाम किया है ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो. हालांकि, स्वयं-सहायता समूहों ने कहा है कि जब तक सरकार बकाया मानदेय और अन्य बकाया राशि का भुगतान नहीं करती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी.
मासूम बच्चों की सेहत पर असर
कुल मिलाकर, इस विरोध का सीधा असर मासूम बच्चों की सेहत और गरीब महिला रसोइयों की आजीविका पर पड़ रहा है. अब यह देखना बाकी है कि राज्य सरकार कितनी जल्दी इन महिलाओं की जायज मांगों पर ध्यान देती है और मिड-डे मील व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाती है.
Bureau Report
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