इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ी सबसे बड़ी खबर, ’24 कोसी परिक्रमा मार्ग’ परियोजना पर रोक से इनकार; जानिए वजह

इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ी सबसे बड़ी खबर, '24 कोसी परिक्रमा मार्ग' परियोजना पर रोक से इनकार; जानिए वजह

इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि यह सरकार की नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण जनहित परियोजना है और ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हित को व्यापक जनहित के आगे झुकना होगा. याची ने संभल में प्रस्तावित 24 कोसी परिक्रमा के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी.

सीएम योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट है ये
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की डिविजन बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया. मेसर्स श्री आरके कोल्ड स्टोरेज एंड जनरल मिल्स व तीन अन्य की तरफ से यह याचिका दाखिल हुई थी. 24 कोसी परिक्रमा के निर्माण के लिए 3200 किसानों की भूमि का 100 करोड़ रुपये से अधिग्रहण होने वाला है. आपको बता दें, 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना सीएम योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है. 

46 साल बाद दोबारा शुरू हुई परिक्रमा
1978 में हुए दंगों के बाद संभल में 24 कोसी परिक्रमा बंद हो गई थी. पिछले साल सीएम योगी के प्रयासों से 46 साल बाद दोबारा परिक्रमा शुरू हुई है. लगभग 50 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग निर्माण का राज्य सरकार ने फैसला किया है. परिक्रमा मार्ग से संभल के 87 धार्मिक स्थल सीधे जुड़ जाएंगे. परिक्रमा मार्ग में आने वाले किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है. अधिग्रहण की जद में आए कई प्रतिष्ठानों और किसानों की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.

याचिकाकर्ता ने क्या बताया?
हाई कोर्ट को याचिकाकर्ता ने बताया कि सरकार की धार्मिक परियोजना के कारण उनकी भूमि प्रभावित हो रही है, जहां वे कोल्ड स्टोर स्थापित करना चाहते हैं. उनका कहना था कि इसके लिए वे ऋण लेने की तैयारी कर रहे हैं और यदि परिक्रमा मार्ग का निर्माण हुआ तो उनका निवेश प्रभावित होगा तथा उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. हालांकि, इन सभी दलीलों को हाई कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया.

हाई कोर्ट का जिलाधिकारी को निर्देश
फिर याचिकाकर्ताओं ने आग्रह किया कि कम-से-कम उन्हें यह बता दिया जाए कि उनकी कितनी भूमि परियोजना में आएगी. इस पर हाई कोर्ट ने संभल के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की उस भूमि का सीमांकन कराएं, जो परिक्रमा मार्ग में शामिल होगी. इसके साथ ही शेष बची जमीन को स्पष्ट रूप से अलग चिन्हित किया जाए. 

कोर्ट ने कहा कि सीमांकन के बाद यह निर्णय याचिकाकर्ता स्वयं करेंगे कि बची हुई भूमि पर वे कोल्ड स्टोर का निर्माण करना चाहचे हैं या नहीं. हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगर कानून के तहत अनुमति हो, तभी परिक्रमा मार्ग से बाहर बची हुई भूमि पर कोल्ड स्टोर का निर्माण किया जा सकेगा.  

Bureau Report

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