संसद के मॉनसून सत्र के बीच राजधानी दिल्ली की सियासी हलचलें अचानक तेज हो गई हैं. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की उच्चस्तरीय ‘मंगल मिलन’ बैठक से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है. तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर अलग मोर्चा बनाने वाले बागी सांसदों में से 3 प्रमुख मुस्लिम सांसदों ने इस बैठक से दूरी बना ली है. संसद भवन में मौजूद रहने के बावजूद इन सांसदों का एनडीए की बैठक में न पहुंचना अब कई तरह के राजनीतिक कयासों को जन्म दे रहा है.
कौन हैं ये 3 सांसद जिन्होंने NDA की बैठक से बनाई दूरी?
गठबंधन की इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित एनडीए के शीर्ष नेता मौजूद थे. टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट और भाजपा के केंद्रीय राज्य मंत्री सुकंत मजूमदार के बयानों के मुताबिक, अनुपस्थित रहने वाले सांसदों में:
1. यूसुफ पठान (पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद)
2. अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद)
3. खलीलुर रहमान
ये तीनों सांसद मंगलवार को संसद परिसर में उपस्थित थे, लेकिन इसके बावजूद वे एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक में शामिल नहीं हुए.
TMC सांसद सौगत रॉय का बड़ा दावा
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने एनडीए की इस बैठक पर तंज कसते हुए दावा किया कि मुर्शिदाबाद और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले ये मुस्लिम सांसद एनडीए की विचारधारा से सहज महसूस नहीं कर रहे हैं. सौगत रॉय ने कहा कि वे स्वतंत्र और धर्मनिरपेक्ष सोच के व्यक्ति हैं. एनडीए का ये गठबंधन उनके स्वभाव और राजनीतिक माहौल के अनुकूल नहीं है. यही वजह है कि वे ममता बनर्जी के खेमे में वापस लौटने के रास्ते तलाश रहे हैं. यदि वे टीएमसी में औपचारिक आवेदन देते हैं, तो शीर्ष नेतृत्व उनकी वापसी पर विचार कर सकता है.
संसद से सड़क तक TMC का तीखा विरोध
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने बागी सांसदों के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर लिया है. पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से दल-बदल विरोधी कानून के तहत बागी सांसदों को तुरंत अयोग्य ठहराने की मांग की है.
संसद के बाहर टीएमसी के निलंबित सांसद कल्याण बनर्जी ने अपने गले में ’20 गद्दार’ लिखा पोस्टर लटकाकर अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन किया. कोलकाता में टीएमसी नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं और एजेंसियों का दुरुपयोग करके टीएमसी को तोड़ने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाली एससीपीआई (SCPI) में शामिल होकर एनडीए को समर्थन देने वाले सभी 20 सांसदों को तुरंत अयोग्य घोषित करने की मांग की. संसद के भीतर और बाहर जारी इस राजनीतिक खींचतान के बीच अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये तीनों सांसद वाकई ममता बनर्जी के कुनबे में वापस लौटेंगे या एनडीए के भीतर ही कोई नया मोड़ आएगा.
Bureau Report
Leave a Reply