अमेरिका में रिसर्च, मेडिकल ट्रेनिंग या यूनिवर्सिटी में पढ़ाने का सपना देख रहे भारतीय डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए बड़ी खबर है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने J-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव जारी किया है. यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेकर लागू होता है, तो J-1 वीजा धारकों के लिए अनुपालन नियम सख्त हो सकते हैं, स्पॉन्सर संस्थानों की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और वीजा अवधि व एक्सटेंशन से जुड़े नए प्रावधान लागू हो सकते हैं.
हालांकि फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इस पर 60 दिनों तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं.
क्यों लाए जा रहे हैं बदलाव?
ये प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिकी प्रशासन पहले ही ‘Duration of Status’ प्रणाली में बदलाव को अंतिम रूप दे चुका है. नए ढांचे के अनुसार J-1 वीजा पर अमेरिका आने वाले अधिकांश लोगों को निर्धारित अवधि तक रहने की अनुमति मिलेगी और लंबी अवधि तक रुकने के लिए वीजा एक्सटेंशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य कानूनी स्थिति बनाए रखने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाना और प्रोग्राम स्पॉन्सर्स की निगरानी को मजबूत करना बताया गया है. हालांकि अंतिम निर्णय सार्वजनिक सुझावों और समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा.
J-1 वीजा आखिर क्या होता है?
J-1 वीजा को Exchange Visitor Visa कहा जाता है. इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों को अमेरिका में अकादमिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक आदान-प्रदान के अवसर उपलब्ध कराना है. इस वीजा के जरिए भारतीय पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्चर्स, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालयों के फैकल्टी सदस्य, मेडिकल रेजिडेंसी या फेलोशिप कर रहे डॉक्टर, शिक्षक, छात्र, इंटर्न और ट्रेनी अमेरिकी विश्वविद्यालयों, रिसर्च संस्थानों और अस्पतालों में पढ़ाई, रिसर्च और प्रशिक्षण कर सकते हैं. इस कार्यक्रम में एक अधिकृत प्रोग्राम स्पॉन्सर की भूमिका अनिवार्य होती है, जो प्रतिभागी के कार्यक्रम की निगरानी करता है.
क्या बदल सकते हैं नियम?
प्रस्तावित नियमों में J-1 वीजा धारकों के लिए कानूनी स्थिति बनाए रखने के मानकों को और सख्त करने की बात कही गई है. इसके अलावा ऐसे आधारों का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है जिनके आधार पर किसी एक्सचेंज विजिटर का प्रोग्राम समाप्त किया जा सकता है. मसौदे में प्रोग्राम नियमों के उल्लंघन के अलावा आपराधिक गतिविधि, धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने, राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं और पात्रता को प्रभावित करने वाली अन्य परिस्थितियों को भी कार्रवाई के आधार के रूप में शामिल किया गया है. यदि किसी प्रतिभागी की कानूनी स्थिति समाप्त हो जाती है तो उसकी बहाली के लिए भी औपचारिक प्रक्रिया तय करने का प्रस्ताव रखा गया है.
भारतीयों पर कितना असर पड़ेगा?
भारत उन देशों में शामिल है जहां से बड़ी संख्या में डॉक्टर, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स और फैकल्टी सदस्य J-1 वीजा पर अमेरिका जाते हैं. उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में भारतीय नागरिकों को 12,000 से अधिक J-1 वीजा जारी किए गए थे. यदि प्रस्तावित नियम लागू होते हैं, तो लंबे समय तक रिसर्च, मेडिकल ट्रेनिंग या शिक्षण कार्य कर रहे भारतीय पेशेवरों को वीजा अवधि, एक्सटेंशन और अनुपालन से जुड़े अतिरिक्त नियमों का पालन करना पड़ सकता है. इससे कई लोगों की शैक्षणिक और पेशेवर योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्ताव में अंतिम रूप से कौन-कौन से प्रावधान शामिल किए जाते हैं.
अभी क्या स्थिति है?
दरअसल, यह बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसे प्रस्तावित नियम के रूप में जारी किया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसे 60 दिनों के लिए सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया है. इस दौरान नागरिक, विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और अन्य संबंधित पक्ष अपने सुझाव दे सकते हैं. इन टिप्पणियों की समीक्षा के बाद ही सरकार अंतिम नियम अधिसूचित करेगी. इसलिए फिलहाल J-1 वीजा धारकों के लिए कोई नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हुआ है. विशेषज्ञों की सलाह है कि अमेरिका में पढ़ाई, रिसर्च या मेडिकल प्रशिक्षण की योजना बना रहे भारतीय उम्मीदवार आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों और अपने प्रोग्राम स्पॉन्सर से मिलने वाले अपडेट पर नियमित नजर रखें, ताकि किसी भी बदलाव की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें.
Bureau Report
Leave a Reply