नेपाल 240 साल तक हिंदू राष्ट्र रहा. अब ये विरासत वापस बहाल करने के लिए नेपाल में नई बहस चल पड़ी है. क्या नेपाल सरकार नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संविधान में दोबारा बदलाव करेगी? नेपाल में हिंसक हो रहे प्रदर्शनकारी तो यही मांग कर रहे हैं. 26 जुलाई को हुई एक सांप्रदायिक हिंसा के बाद नेपाल के हिंदू संगठन सड़क पर आ चुके हैं, और हिंसक विरोध प्रदर्शन के साथ सरकार पर हिंदू राष्ट्र बनाने का दबाव बना रहे हैं.
क्या फिर नेपाल बनेगा हिंदू राष्ट्र?
नेपाल में ये नया बवाल है. इस बवाल में शामिल हर शख्स की एक ही आवाज है- नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करो. हिंदू संगठनों का ये विरोध-प्रदर्शन पिछले 2 दिनों में हिंसक हो चला है. सरकारी दफ्तरों में आग और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं आम हो चुकी है.
ये पूरा बवाल 26 जुलाई को सुनसरी के देवानगंज में धार्मिक जुलूस में हिंसा के बाद भड़का है. जुलूस में हिंसा के बाद नेपाल के संयुक्त हिंदू मोर्च और दूसरे संगठनों ने नेपाल से घुसपैठियों को बाहर करने और संसद में हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव लाने की मांग कर रहे हैं.
नेपाल के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन इतना हिंसक है, कि लोग प्रदर्शनकारियों की आहट सुनते ही दुकानें बंद कर रहे हैं. सड़कों पर पुलिस की तैनाती जरूर है, लेकिन इन्हें अभी शांति बरतने के निर्देश हैं.
नेपाल सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने और सीमाओं पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. प्रधानमंत्री बालेन शाह ने साफ किया है कि हिंदू राष्ट्र के प्रस्ताव के नेपाल का वर्तमान संघीय व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
नेपाल कब तक रहा हिंदू राष्ट्र?
- आधिकारिक रूप से नेपाल सन 1768 से 2008 तक 240 साल हिंदू राष्ट्र था.
- 1768 में पृथ्वी नारायण शाह ने गोरखा साम्राज्य का विस्तार इसे हिंदू राष्ट्र घोषित किया था.
- 1975 में राजा बीरेंद्र ने नेपाल को आधिकारिक रूप से हिंदू अधिराज्य’ दर्जा दिया
- 2006-2008: जन आंदोलन और राजशाही के पतन के बाद अंतरिम संविधान पर बहस चली.
- मई 2008 में देश से राजतंत्र खत्म कर इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया.
अब 18 साल बाद नेपाल में वही बहस फिर से छिड़ी है. क्या नेपाल को हिंदू राष्ट्र फिर से घोषित किया जाना चाहिए. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि युवाओं के आंदोलन के साथ उन्होंने नेपाल की पुरानी सरकार का विरोध इसी भरोसे के साथ किया था, कि नई सरकार हिंदू राष्ट्र का अपना वादा पूरा करेगी.
लेकिन प्रधानमंत्री और पूरी कैबिनेट को डर है, कि हिंदू राष्ट्र की मांग माने जाने के बाद संवैधानिक जटिलताएं और बढ़ जाएगी. लेकिन सवाल ये है, कि लगातार हिंसक हो रहा ये विरोध प्रदर्शन कैसे खत्म होगा?
Bureau Report
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