मान गए नीतीश कुमार!, अब डिप्टी सीएम बने रहेंगे तेजस्वी यादव

मान गए नीतीश कुमार!, अब डिप्टी सीएम बने रहेंगे तेजस्वी यादवपटनाहोटल भूमि घोटाला मामले में हो रही सीबीआई जांच में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नाम आने के बाद महागठबंधन सरकार में शामिल जदयू ने उनके इस्तीफे की मांग की थी. जिसके बाद ऐसा लग रहा था यह गठबंधन टूट जाएगा. लेकिन अब खबर आ रही है कि मंगलवार शाम तेजस्वी की सीएम नीतीश कुमार के साथ बैठक हुई जिसमें सुलह का रास्ता निकल गया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार ने कहा, तेजस्वी को अब इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है. यानी तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम बने रहेंगे. पटना स्थित पुराने सचिवालय में मंगलवार शाम करीब एक घंटे तक चली राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद तेजस्वी मुख्यमंत्री के कक्ष में गए. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और तेजस्वी के भाई तेजप्रताप यादव और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी भी मुख्यमंत्री के कक्ष में उपस्थित थे. सूत्रों के अनुसार सीएम के कक्ष में 50 मिनट की बैठक में सुलह का फॉर्मुला निकाला गया. अब यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जदयू, राजद और कांग्रेस का महागठबंधन अटूट है.

डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के सोमवार (17 जुलाई) को एक तरह से अपने इस्तीफा देने की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह केवल मीडिया में है. पिछले बुधवार (12 जुलाई) को कैबिनेट की बैठक के बाद पुराने सचिवालय गेट पर डिप्टी सीएम की प्रतिक्रिया लेने पहुंचे मीडियाकर्मियों के साथ उनके के सुरक्षा गार्डों के कथित दुर्व्यवहार की घटना के बाद मंगलवार (18 जुलाई) कैबिनेट की बैठक के समय मीडियाकर्मियों का पुराने सचिवालय में प्रवेश पर बैन लगा दिया था और कैबिनेट की ब्रीफिंग सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सभागार में हुई. 

गौर हो कि लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान 2004 में रांची और पुरी स्थित आईआरसीटीसी के दो होटलों का लाइसेंस जारी किए जाने के बदले लालू के परिवार को तीन एकड़ भूखंड दिए जाने के मामले में तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद, राबडी देवी और पांच अन्य का नाम आने के मद्देनजर सीबीआई ने पिछले शुक्रवार (14 जुलाई) को लालू के आवास सहित 12 ठिकानों पर छापे मारे थे. इसके बाद करीब पांच दिनों तक चुप रही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने तेजस्वी से उनपर लगे आरोपों के बारे में पूर्ण तथ्यों के साथ जनता की अदालत के बीच जाने को कहा था और इस्तीफे की भी मांग की थी. लेकिन राजद प्रमुख ने अपनी ओर से महागठबंधन को तोड़ने से इनकार करते हुए अपने विधायक दल के उस निर्णय (तेजस्वी के इस्तीफे का कहीं कोई प्रश्न ही नहीं उठता) का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया था और उन्होंने कहा था कि सारी बातें पहले से सार्वजनिक है, जिसे देखना हैं देखें. 

तेजस्वी पर सुशील मोदी के ये हैं आरोप
वहीं तेजस्वी के इस्तीफे की मांग कर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू और उनके परिवार पर अपने प्रहार को जारी रखते हुए आज कहा कि तेजस्वी यादव एवं 7 अन्य पर सीबीआई ने आईपीसी की धारा 120 बी एवं 420 तथा भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम 1988 की धारा 13 (2) 13 (1) डी के तहत दर्ज किया है. सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि डिलाईट मार्केंटिंग की 3 एकड़ जमीन जब सरला गुप्ता ने तेजस्वी को 2013-14 में सौंपी उस समय वे दाढ़ी मूंछ सहित पूरी तरह बालिग थे. उन्होंने आरोप लगाया कि जब तेजस्वी ने 3 एकड़ जमीन पर 7 लाख 66 हजार स्क्वायर फुट का 12 मंजिला बिहार के सबसे बड़े मॉल के निर्माण का उद्घाटन 5 मर्इ् 2016 को सुरसंड विधायक दोजाना की कम्पनी के साथ किया उस समय तेजस्वी केवल दाढी-मूंछ वाले ही नहीं बल्कि राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री भी थे. सुशील ने आरोप लगाया कि डिलाईट मार्केंटिंग के माध्यम से जब तेजस्वी दिल्ली एवं पटना की 13 अन्य संपत्ति (मकान सहित) के मालिक बने उस समय तेजस्वी ‘दुधमुंहां’ बच्चे नहीं बल्कि 23 वर्ष के थे और पूरी तरह बालिग थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार तेजस्वी यादव कुल 26 सम्पति के मालिक हैं. इसमें से 13 सम्पति कम्पनियों के माध्यम से हैं और 13 सम्पति जो उनके नाम से पंजीकृत हुई है. सुशील ने आरोप लगाया कि कुल 26 संपत्ति में से 13 के मालिक तेजस्वी तब बने जब वे या तो ‘दुधमुंहे’ बच्चे थे या आठवीं-नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे और बाकी 13 संपत्ति के मालिक तब बने जब वे 24 वर्ष की उम्र के थे, दाढी-मूंछ थी और पूरी तरह बालिग थे. उन्होंने कहा कि उपरोक्त 26 में से 13 संपत्ति को आय कर विभाग ने बेनामी घोषित कर औपबन्धिक रूप से जब्त कर लिया है. सुशील ने आरोप लगाया कि तोहफें लेते समय या जमीन लिखवाते समय कभी नहीं कहा कि मेरी दाढी-मूंछ नहीं है इसलिए जमीन नहीं लूंगा लेकिन दाढी-मूंछ होने पर 13 बेनामी सम्पति के मालिक बन गए और फंस गए तो कहते हैं कि मेरी तो उस समय दाढी मूंछ भी नहीं थी.

जदयू के नेताओं ने कहा था
होटल के बदले भूखंड मामले में सीबीआई के छापे के बाद तेजस्वी पर लगे आरोपों के बारे में उन्हें पूर्ण तथ्यों के साथ जनता की अदालत के बीच जाने की बात करने वाली जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा था, हठधर्मिता से बड़ा होता है गठबंधन धर्म. जदयू के एक अन्य प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने (मंगलवार को (18 जुलाई) फिर अपने पार्टी के रुख को दोहराया. जदयू के प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करेंगे. यह पूछे जाने पर कि उनकी पार्टी इस मामले में राजद से क्या उम्मीद करती है, त्यागी ने कहा था कि राजद नेता को आरोप के संदर्भ में विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए. 

भाजपा के वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा था
नीतीश कुमार और लालू यादव दोनों के दोस्त कहे जाने वाले सिन्हा से महागठबंधन के बीच में दरार पैदा कर रहे इस मामले के बारे मे पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, दोस्ती निजी है लेकिन इस मामले (तेजस्वी यादव) में मैं न तो इस्तीफा मांगने का समर्थन कर रहा हूं, न ही इसका विरोध कर रहा हूं. बिहारी बाबू के नाम से लोकप्रिय सिन्हा ने अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा था, मैं इस राजनीतिक मामले पर विशेषज्ञ नहीं हूं और इस मामले को हल करने का काम उनका (नीतीश और लालू) का है. उन्होंने कहा था, वो लोग काफी परिपक्व हैं और खुद से ही इस मामले का हल निकालेंगे. पटना साहिब से भाजपा सांसद ने कहा था, मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि बिहार मध्यावधि चुनाव में न जाए. सिन्हा ने यह भी कहा था, ‘विभि‍न्न पार्टियों में ऐसे लोग हैं जो तब भी मंत्री बने हुए हैं जब उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया जा चुका है या उनका मामला अदालत में अलग-अलग चरणों में है. राजद अन्य लोगों के साथ ही केंद्रीय मंत्री उमा भारती का उदाहरण देता रहा है जिन पर अयोध्या में विवादास्पद ढांचा गिराने के मामले में आरोपपत्र दायर है लेकिन वह मंत्रालय में बनी हुई हैं. हालांकि नेता ने किसी भी मंत्री का नाम नहीं लिया और तेजस्वी यादव का नाम लेने से भी परहेज किया.

Bureau Report

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