Air India Crash: क्या जानबूझकर छिपाया गया कॉकपिट का डेटा? सवालों में ‘ब्लैक बॉक्स’ थ्योरी

Air India Crash: क्या जानबूझकर छिपाया गया कॉकपिट का डेटा? सवालों में 'ब्लैक बॉक्स' थ्योरी

12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया फ्लाइट 171 के दर्दनाक हादसे की जांच में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है. पायलटों की सबसे बड़ी संस्था ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स’ (FIP) ने इस मामले में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की अंतरिम जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. FIP ने सीधा और बड़ा आरोप लगाया है कि शुरुआती रिपोर्ट में से कॉकपिट के बेहद जरूरी वॉर्निंग डेटा (Alert Data) को जानबूझकर गायब या ओमिट किया गया है.

पायलट एसोसिएशन का दावा है कि विमान के इंजन फेल होने से ठीक पहले उसमें भारी इलेक्ट्रिकल खराबी (बिजली की विफलता) आई थी, लेकिन जांच रिपोर्ट में इस बेहद महत्वपूर्ण पहलू से जुड़े सबूतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में FIP के प्रेसिडेंट कैप्टन सी. रंधावा ने कहा कि यदि विमान में वैसी ही इलेक्ट्रिकल खराबी आई थी जैसा कि अंदेशा है, तो कॉकपिट सिस्टम में कई सारे चेतावनी संदेश और ऑडियो अलर्ट आने चाहिए थे. ये अलर्ट कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) में दर्ज होते हैं, लेकिन अंतरिम रिपोर्ट में इनका कोई जिक्र न होना बड़े सवाल खड़े करता है. इतना ही नहीं, FIP ने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) की हालत पर भी हैरानी जताई. विमान का पिछला हिस्सा (Tail Section) पूरी तरह सुरक्षित मिलने के बावजूद रिकॉर्डर का बुरी तरह डैमेज मिलना समझ से परे है.

FIP ने खुद किए 10 सिम्युलेटर टेस्ट

फेडरेशन ने बताया कि जब सरकार और जांच एजेंसियों ने उनके सिम्युलेटर टेस्ट कराने के सुझाव को बार-बार खारिज कर दिया, तो FIP ने खुद बोइंग 787 प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके 10 स्वतंत्र सिम्युलेटर एक्सरसाइज कीं. इन सिमुलेशन टेस्ट के नतीजों ने सरकारी रिपोर्ट के दावों की हवा निकाल दी है.

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इंजन बंद होने के महज 4 सेकंड के भीतर रैम एयर टर्बाइन (RAT) जो बिजली जाने पर जरूरी हाइड्रोलिक और इलेक्ट्रिकल काम बहाल करने वाला इमरजेंसी सिस्टम है चालू हो गया था. जबकि FIP के सिमुलेशन टेस्ट में यह साबित हुआ कि दोनों इंजन बंद होने के बाद RAT को हाइड्रोलिक प्रेशर शुरू करने में कम से कम 18 सेकंड का समय लगता है. यह टाइमिंग का अंतर जांच की प्रामाणिकता पर बड़ा संदेह पैदा करता है.

‘हडसन नदी’ हादसे का दिया हवाला

पायलट एसोसिएशन ने सरकार से आधिकारिक तौर पर मांग की है कि अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले पूरे हादसे का ‘सिम्युलेटर-बेस्ड रिकंस्ट्रक्शन’ (विमान को दोबारा सिम्युलेटर पर उड़ाकर जांचना) कराया जाए. अपनी इस मांग को मजबूती देने के लिए कैप्टन रंधावा ने साल 2009 में अमेरिका की हडसन नदी में हुई ‘यूएस एयरवेज’ की ऐतिहासिक इमरजेंसी लैंडिंग का हवाला दिया. उन्होंने याद दिलाया कि उस वक्त भी जांचकर्ताओं ने पहले क्रू (पायलट्स) के फैसले पर सवाल उठाए थे, लेकिन जब दर्जनों बार सिम्युलेटर टेस्ट किए गए, तब जाकर सच सामने आया कि पायलटों का फैसला बिल्कुल सही था.

FIP चीफ ने बेहद भावुक और तार्किक रुख अपनाते हुए कहा कि इस हादसे की पूरी और निष्पक्ष जांच होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि एयर इंडिया क्रैश में शामिल पायलट अब इस दुनिया में नहीं हैं जो खुद सामने आकर अपना पक्ष या घटनाओं का सच बता सकें. ऐसे में सिम्युलेटर एनालिसिस के जरिए एक निष्पक्ष और वैज्ञानिक रिकंस्ट्रक्शन ही अंतिम रिपोर्ट को भरोसेमंद बना सकता है.

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*