मृतकों का अपमान क्यों? कफन बाहर आए, कंकाल दिखने लगे..और मुआवजे के नाम पर थमाया सिर्फ 100 रुपये का नोट

मृतकों का अपमान क्यों? कफन बाहर आए, कंकाल दिखने लगे..और मुआवजे के नाम पर थमाया सिर्फ 100 रुपये का नोट

मथुरा: मथुरा में एक नगर निगम के जेसीबी द्वारा क्षतिग्रस्त की गई नौ कब्रों के लिए प्रति कब्र 100 रुपये के आधिकारिक मुआवजे पर मुस्लिम कब्रिस्तान समिति ने कड़ा विरोध जताया है. समिति ने इस मुआवजे को ‘मृतकों का अपमान’ करार दिया है. यह घटना तब हुई जब मथुरा-वृंदावन नगर निगम से जुड़ी एक अर्थमूवर मशीन कथित तौर पर अप्रैल महीने में एक वक्फ कब्रिस्तान में दाखिल हो गई थी.

रात के अंधेरे में हुई घटना
यह घटना 26 अप्रैल की रात को हुई, जब मथुरा के मनोहरपुरा इलाके में स्थित 117 साल पुराने ‘कब्रिस्तान अहले मुस्लिमीन’ के पश्चिमी छोर पर एक सरकारी पानी की टंकी के पास काम चल रहा था. इसी दौरान नेचर ग्रीन टूल्स एंड मशीन्स प्राइवेट लिमिटेड की एक मशीन, जो नगर निगम से संबद्ध है, कथित तौर पर कब्रिस्तान परिसर में घुस गई.

100 रुपये का मुआवजा तय
कब्रिस्तान समिति के सचिव शाकिर हुसैन ने बताया कि आधिकारिक मूल्यांकन पर विश्वास करना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने प्रति कब्र 100 रुपये, प्रति पेड़ 100 रुपये और प्रति कंक्रीट पिलर के लिए 100 रुपये का मुआवजा तय किया है.  परिजनों ने देखा कि कब्रें कुचल दी गईं, कफन जमीन से बाहर आ गए और कंकाल तक दिखने लगे थे. इसके बावजूद आधिकारिक मूल्यांकन सिर्फ 100 रुपये प्रति कब्र लगाया गया. क्या सरकारी रिकॉर्ड में मृतकों की गरिमा की यही कीमत है?”

मुआवजा मौजूदा नियमों के तहत तय किया गया-नगर निगम अधिकारी
दूसरी ओर, नगर निगम के अधिकारियों ने इस मूल्यांकन को सही ठहराया है. अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह ने बताया कि नगर निगम ने संबंधित विभाग द्वारा तैयार की गई मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मुआवजे की गणना उस समय के अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों और मौजूदा नियमों के अनुसार की गई थी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि नागरिक निकाय (नगर निगम) धार्मिक या दफन स्थलों को होने वाले किसी भी नुकसान का समर्थन नहीं करता है.

वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में दर्ज है…
जानकारी के अनुसार, कब्रिस्तान समिति के लगभग तीन दशकों से अध्यक्ष रहे 89 वर्षीय जमालुद्दीन खान द्वारा इस मामले में दो शिकायतें दर्ज कराई गई थीं. उन्होंने कहा कि यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में यह कब्रिस्तान एक गजटेड वक्फ अधिसूचित संपत्ति है.

26 अप्रैल की घटना के बाद, जमालुद्दीन ने उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी.नगर निगम की प्रतिक्रिया के बाद शुरू में इस शिकायत को बंद कर दिया गया था, लेकिन खराब फीडबैक मिलने के बाद मामले को दोबारा संज्ञान में लिया गया है.

Bureau Report

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