फरीदाबाद से एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आई है. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने लाल किला ब्लास्ट मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं. इस नई चार्जशीट से पता चला है कि इस भयानक आतंकी साजिश के तार सीधे तौर पर फरीदाबाद से जुड़े थे और यहीं पर बड़े पैमाने पर बम बनाने का काम चल रहा था.
अलफलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा था ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल
एनआईए की गहन जांच में फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी से एक बहुत बड़े आतंकी गठजोड़ का भंडाफोड़ हुआ है. जांच एजेंसी के मुताबिक, यहां एक ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल सक्रिय था. इसका मतलब है कि देखने में सामान्य और पढ़े-लिखे लगने वाले लोग इस खौफनाक साजिश का हिस्सा थे, जो गुपचुप तरीके से आतंकी नेटवर्क को चला रहे थे. एनआईए द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में सामने आए इन गंभीर मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों को भी सकते में डाल दिया है.
यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर ही होता था बमों का परीक्षण
इस मामले में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला खुलासा यह है कि बम बनाने और उनका परीक्षण करने के लिए किसी दूर-दराज या छिपे हुए ठिकाने का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी परिसर का ही इस्तेमाल किया जा रहा था. आतंकियों ने अलफलाह यूनिवर्सिटी के अंदर ही विस्फोटकों को असेंबल करने की व्यवस्था कर रखी थी और बड़ी ही चालाकी से वहीं पर इन बमों की टेस्टिंग (परीक्षण) भी की जाती थी. एक शिक्षण संस्थान का इस तरह आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होना जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है.
कश्मीर से की जा रही थी हथियारों और विस्फोटकों की सप्लाई
चार्जशीट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस पूरे आतंकी नेटवर्क को सीमा पार और घाटी से पूरी मदद मिल रही थी. फरीदाबाद में बम बनाने के लिए जितने भी जरूरी रसायन, अन्य विस्फोटक पदार्थ और खतरनाक हथियार इस्तेमाल हो रहे थे, उन सब की सप्लाई सीधे कश्मीर से आ रही थी. इस खुलासे के बाद खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे सप्लाई चेन और नेटवर्क की और अधिक गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि इस आतंकी मॉड्यूल में शामिल हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके.
Bureau Report
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