32 साल का इंतजार हुआ खत्म, हरियाणा और राजस्थान के बीच साइन हुआ MOU, जानें पूरी जानकारी

32 साल का इंतजार हुआ खत्म, हरियाणा और राजस्थान के बीच साइन हुआ MOU, जानें पूरी जानकारी

आज राजस्थान के लोगों के लिए बेहद खास दिन है. यमुना जल बटवारे को लेकर हरियाणा और राजस्थान सरकार के बीच MOU साइन कर लिया गया है. इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल विशेष रूप से मौजूद रहें. इनके साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इस समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान उपस्थित रहें.

तीन दशकों से सिर्फ कागजों में सिमटा था राजस्थान का हक
केंद्र सरकार की मध्यस्थता में 12 मई 1994 को यमुना बेसिन के राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर एक अहम समझौता हुआ था. उस करार के तहत राजस्थान को यमुना के कुल उपलब्ध पानी का 10.4 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया था, जो सालाना लगभग 577 मिलियन क्यूबिक मीटर होता है. पानी का यह हक राजस्थान को 1994 में ही मिल गया था, लेकिन इसे राज्य तक लाने के लिए कोई भी ठोस ढांचा तैयार नहीं हो सका. इसी बुनियादी ढांचे की कमी के कारण पिछले तीस सालों से राजस्थान अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था और अब यह नया समझौता इसी गतिरोध को खत्म करने जा रहा है.

हथिनीकुंड बैराज से पाइपलाइन के जरिए पहुंचेगा पानी
इस नए समझौते का मुख्य लक्ष्य 1994 के उसी पुराने जल बंटवारे को जमीन पर लागू करना है. इस योजना के मुताबिक, हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से एक लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जो यमुना का पानी सुरक्षित तरीके से राजस्थान की सीमा तक लेकर आएगी. सरकार का मानना है कि खुली नहर के बजाय पाइपलाइन से पानी लाने पर धूप से पानी के वाष्पीकरण और रिसाव की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी. इसके साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया में बहुत ज्यादा जमीन अधिग्रहण करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और पानी को सीधे पेयजल आपूर्ति प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा.

शेखावाटी अंचल के लाखों लोगों की बुझेगी प्यास
इस जल परियोजना का सबसे बड़ा फायदा राजस्थान के शेखावाटी इलाके को मिलेगा, जिसमें मुख्य रूप से सीकर, झुंझुनू और चूरू जिले शामिल हैं. इन जिलों में पिछले कई सालों से भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है और यहां के पानी में फ्लोराइड तथा खारेपन की बहुत बड़ी समस्या है. यमुना का मीठा पानी पहुंचने से इस इलाके के लाखों लोगों को पीने के पानी के भारी संकट से स्थायी तौर पर निजात मिल सकेगी. यह कोई नया जल बंटवारा नहीं है, बल्कि राजस्थान को उसका बत्तीस साल पुराना हक दिलाने की एक व्यावहारिक पहल है, जो राज्य के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि साबित होगी.

Bureau Report

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