रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया. 29 जुलाई यानी बुधवार सुबह एर्नाकुलम-पुणे एक्सप्रेस ट्रेन में एक बड़ी तकनीकी खराबी सामने आई. ट्रेन जब नवी मुंबई के पनवेल रेलवे स्टेशन पहुंची, तो जांच के दौरान उसके ‘B1’ यानी AC डिब्बे में एक पार्ट टूटा हुआ मिला. कर्मचारियों की सतर्कता से समय रहते खराबी पकड़ में आ गई और एक बड़ा हादसा टल गया. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी भी यात्री को चोट नहीं आई है और सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं.
ट्रेन सुबह करीब 6:30 बजे पनवेल स्टेशन पर रुकी थी. रूटीन जांच के दौरान रेलवे के जांच कर्मचारियों ने देखा कि B1 डिब्बे का ‘कंट्रोल आर्म’ (गाड़ी का संतुलन बनाए रखने वाला एक अहम हिस्सा) टूट चुका था. लिहाजा अधिकारियों ने तुरंत फैसला लिया और उस खराब डिब्बे को पूरी ट्रेन से अलग कर दिया गया.
B1 डिब्बे में सफर कर रहे सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से ट्रेन के बाकी खाली डिब्बों में शिफ्ट करने के बाद ट्रेन को पुणे के लिए रवाना कर दिया गया.
क्या थी तकनीकी खराबी?
दरअसल, पनवेल रेलवे स्टेशन पर कैरिज एंड वैगन (C&W) स्टाफ द्वारा की गई जांच में B1 कोच का ‘कंट्रोल आर्म’ टूटा हुआ पाया गया था, जो ट्रेन के सस्पेंशन और स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है. इसे ‘कैरिज एंड वैगन फेलियर’ घोषित करते हुए अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कोच को अलग करने का फैसला लिया.
क्या होता है C&W (कैरिज एंड वैगन) फेलियर?
जब ट्रेन स्टेशन पर रुकती है, तो रेलवे के इंजीनियर और कर्मचारी ट्रेन के सभी डिब्बों (कोच) की नीचे से जांच करते हैं. अगर जांच के दौरान डिब्बे के किसी जरूरी हिस्से में कोई खराबी या टूट-फूट मिलती है, तो उसे टेक्निकल भाषा में C&W फेलियर कहा जाता है. खराबी ब्रेक सिस्टम, सस्पेंशन, पहियों के अलावा डिब्बे के ढांचे में भी आ सकती है.
अगर खराबी ऐसी है, जिससे आगे ट्रेन चलाने पर दुर्घटना (जैसे पटरी से उतरना) का डर हो, तो रेलवे तुरंत फैसला लेता है. ऐसी स्थिति में उस खराब डिब्बे को पूरी ट्रेन से काटकर अलग कर दिया जाता है. यही एर्नाकुलम-पुणे एक्सप्रेस ट्रेन के साथ हुआ.
Bureau Report
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