1 जुलाई को भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये और डीजल के में 3 रुपये की गिरावट कर दी. दूसरी तरफ भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 183 रुपये की कटौती कर दी. खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार तेल और गैस के दाम में राहत मिली. हालांकि ये राहत सीमित रही, क्योंकि घरेलू गैस सिलेंडर और देश के 90 फीसदी मार्केट को कैप्चर करने वाले सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई कटौती नहीं की. यानी 90 फीसदी पेट्रोल-पंपों पर अभी भी बढ़े हुए दाम भाव पर ही पेट्रोल-डीजल मिलेंगे. सवाल यह कि आखिर तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में कब कटौती करेगी ?
नायरा एनर्जी से घटाए तेल के दाम, सरकारी तेल कंपनियां कब देगी राहत ?
भारत में कई प्रमुख तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL),ओएनजीसी (ONGC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई कटौती नहीं की है. भारत के 90 फीसदी बाजार पर इन कंपनियों का कब्जा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर से गिरकर 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. इंडिया का क्रूड बास्केट भी ईरान युद्ध के बाद पहली बार 68.86 डॉलर प्रति बैरल के मार्क पर पहुंच गया है. अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद पहली बार कच्चा तेल इस कीमत पर गिर गया है. यह कीमत 23 मार्च को दर्ज 157.04 डॉलर प्रति बैरल के ऑल टाइम हाई की तुलना में 56 प्रतिशत से ज्यादा कम है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम में गिरावट की उम्मीद फिलहाल नहीं है.
पेट्रोल-डीजल के दाम कब गिरेंगे ?
कच्चे तेल के दाम में गिरावट से भारत का आयात बिल घटा है, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हुआ है.सरकार के राजकोषीय घाटे में राहत मिली है, लेकिन अगर आप ये सोच रहे हैं कि इससे पेट्रोल-डीजल के दाम में कटौती कर आम लोगों को राहत मिल सकती है, तो फिलहाल इसके लिए इंतजार थोड़ा लंबा है. सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल अपने घाटे की भरपाई कर रही है. अपना घाटा पूरा करने के बाद ही वो उपभोक्ताओं तक इस राहत को पास करेंगी.
पहले अपने नुकसान की भरपाई करेंगी तेल कंपनियां
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर तक पहुंचने और होर्मुज बंद होने की वजह से शिपिंग कॉस्ट बढ़ने की वजह से तेल कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा. हर लीटर पेट्रोल पर लगभग 5.5 रुपये और डीजल पर 4.5 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी झेलनी पड़ी. वहीं LPG सिलेंडर हर 650 से 720 रुपये का घाटा झेलना पड़ा है. वहीं सरकार ने तेल कंपनियों के बोझ को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती की, जिससे चालू वित्त वर्ष में सरकारी खजाने पर करीब 30,000 करोड़ रुपये का सीधा बोझ पड़ा. अब जबकि वैश्विक बाजार में तेल के दाम गिरे है, तो सरकार और सरकारी तेल कंपनियां इस नुकसान की भरपाई कर रही है.
क्यों नहीं घट रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
RedoQ की साीईओ दीपल दत्ता की माने तो सस्ते कच्चे तेल से भारत की अर्थव्यवस्था को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन ये राहत आम लोगों तक फिलहाल तुरंत नहीं पहुंचने वाली है.सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) पहले अपने पिछले नुकसान और अपने मुनाफे को मजबूत करेंगी, फिर रिटेल उपभोक्ताओं तक इस राहत को पहुंचाएंगी. तेल कंपनियां अभी अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने को प्राथमिकता दे रही हैं. ऐसे में भारत में आने वाले कुछ दिनों या हफ्तों में पेट्रोल-डीजल के दाम घटने की उम्मीद कम है. इसके अलावा अभी भी भू-राजनीतिक तनाव के हालात बने हुए हैं, ऊर्जा अभी भी संवेदनशील मसला बना हुआ है. अमेरिका-ईरान के बीच फिर से तनाव की स्थिति बन सकती है. इसी अनिश्चितता को देखते हुए तेल कंपनियां जल्दबाजी में पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने से बच रही हैं.
Bureau Report
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