क्या कोई सरकारी आयोग का अध्यक्ष, जिसकी आय लाखों रुपये हो, उसकी बेटी सिर्फ 40 हजार रुपये सालाना आय दिखाकर आरक्षण का लाभ ले सकती है? कर्नाटक में सामने आए एक मामले ने पूरे देश में इसी सवाल पर बहस छेड़ दी है. आरोप है कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार की दोनों बेटियों ने कथित तौर पर गलत आय और जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की. मामला सामने आने के बाद राज्यपाल ने उन्हें निलंबित कर दिया है और अब इस पूरे विवाद की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की सिफारिश की गई है.
क्या है पूरा विवाद?
कर्नाटक लोक सेवा आयोग सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती कराने वाली संवैधानिक संस्था है. इसके अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दोनों बेटियों को औद्योगिक विस्तार अधिकारी के पद पर चयनित कराने में अपने पद का अनुचित फायदा पहुंचाया. शिकायतों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनकी बेटियां उम्मीदवार थीं, लेकिन इसके बावजूद साहूकार ने खुद को चयन प्रक्रिया से अलग नहीं किया. इतना ही नहीं, उन्होंने आयोग के सामने हितों के टकराव की जानकारी भी नहीं दी.
फर्जी आय प्रमाण पत्र
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद आय प्रमाण पत्र को लेकर है. आरोप है कि साहूकार की छोटी बेटी ने ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर का लाभ लेने के लिए परिवार की वार्षिक आय सिर्फ 40 हजार रुपये बताई. जबकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि साहूकार लंबे समय से उच्च सरकारी पदों पर रहे हैं और उनकी वास्तविक आय इस सीमा से बहुत ज्यादा है.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी कम आय का प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ और उसके आधार पर आरक्षण का फायदा कैसे मिल गया. राजभवन का कहना है कि अगर आरोप सही पाए गए तो, ये तथ्यों को छिपाकर सरकारी सुविधा लेने का मामला हो सकता है.
2002 का सरकारी आदेश भी चर्चा में
मामले की जांच के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया. कर्नाटक सरकार ने साल 2002 में आदेश जारी किया था कि लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के बच्चों को पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का फायदा नहीं मिलेगा. इसलिए अब ये भी जांच का विषय है कि इस नियम के बावजूद उनकी बेटियों का चयन किस आधार पर हुआ.
राज्यपाल ने क्या कार्रवाई की?
आरोपों को गंभीर मानते हुए कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को उनकी दो बेटियों के कथित अवैध चयन के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया है. साथ ही राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट से कराई जाए. इस बीच आयोग के वरिष्ठ सदस्य डॉ. बी. प्रभुदेवा को अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
साहूकार ने आरोपों को बताया गलत
शिवशंकरप्पा एस. साहूकार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं. बता दें कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग पहले भी कई बार भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवादों में रहा है. आयोग पर समय-समय पर भाई-भतीजावाद, भर्ती में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में इस नए विवाद ने आयोग की साख पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं
फिलहाल, ये मामला जांच के चरण में है. अगर सुप्रीम कोर्ट की जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. वहीं अगर आरोप गलत पाए जाते हैं तो साहूकार को राहत मिल सकती है.
Bureau Report
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