पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित 14वीं सदी की अदीना मस्जिद के परिसर के बाहर एक हिंदू संगठन ने शिवलिंग स्थापित कर पूजा करने की घोषणा की है. वहीं, कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है. 650 साल पुरानी अदीना मस्जिद के पास हिंदू संगठनों द्वारा एक विशाल शिवलिंग पहुंचाए जाने से नया मंदिर-मस्जिद विवाद खड़ा हो गया है.
हुगली जिले के तारकेश्वर से लाए गए इस 1.5 टन वजनी शिवलिंग को सावन के दूसरे सोमवार पर स्थापित करने की योजना है. मस्जिद परिसर के बाहर एक हिंदू संगठन ने शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना करने की घोषणा की है. इस घोषणा के बाद इलाके में धार्मिक और सामाजिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है. प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
तारकेश्वर से लाया गया करीब डेढ़ टन का शिवलिंग
जानकारी के मुताबिक, हुगली जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तारकेश्वर से लगभग 1.5 टन वजनी शिवलिंग मालदा लाया गया है. संगठन का कहना है कि सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर इसे अदीना मस्जिद परिसर के बाहर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाएगी. शिवलिंग को निर्धारित स्थान तक पहुंचा दिया गया है और स्थापना की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं.
मुस्लिम संगठनों ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर, कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई है. उनका कहना है कि ऐतिहासिक और संवेदनशील स्थल होने के कारण वहां किसी भी नए धार्मिक आयोजन या निर्माण से पहले प्रशासन को यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए. उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर शांति और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती
दोनों पक्षों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे और कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी. फिलहाल इलाके में माहौल
विवाद और घटनाक्रम के मुख्य बिंदु
शिवलिंग की स्थापना: ‘आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर’ समिति और भाजपा नेता काजल गोस्वामी के नेतृत्व में हुगली के तारकेश्वर से 3.6 फीट ऊंचा और 1.5 टन वजनी शिवलिंग मालदा लाया गया है.
हिंदू संगठनों का दावा: आयोजकों का दावा है कि 14वीं शताब्दी (1373 ईस्वी) में बनी अदीना मस्जिद असल में प्राचीन ‘आदिनाथ शिव मंदिर’ को तोड़कर बनाई गई थी.
प्रशासन और एएसआई की चेतावनी: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसे एक संरक्षित स्मारक मानता है और इसके भीतर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि पर रोक है. बढ़ते तनाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और बिना अनुमति के किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है.
Bureau Report
Leave a Reply