देश की सेना की कमान संभालने वाला हर अधिकारी अपने करियर का सबसे गौरवशाली पल जीता है, लेकिन नए सेना प्रमुख जनरल धीरज कुमार सेठ ने इस ऐतिहासिक मौके को अपने संस्कारों से और भी खास बना दिया. गार्ड ऑफ ऑनर मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने पिता, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ को सैन्य सलामी दी और फिर झुककर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया.
इस भावुक पल ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया. खास बात यह रही कि उनके छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ ने भी बड़े भाई को सैन्य सलामी देकर इस पल को और यादगार बना दिया. अब जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
क्या था वह भावुक पल जिसने सबका दिल जीत लिया?
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में जनरल धीरज कुमार सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला. इस मौके पर उन्हें पारंपरिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. लेकिन समारोह का सबसे यादगार पल तब आया, जब उन्होंने सबसे पहले अपने पिता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ को सैन्य सलामी दी. इसके बाद उन्होंने झुककर पिता के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया. यह दृश्य वहां मौजूद सैन्य अधिकारियों और मेहमानों के लिए बेहद भावुक था. इसके तुरंत बाद उनके छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ ने भी नए सेना प्रमुख को सैन्य सलामी दी. एक ही परिवार के तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का यह दृश्य भारतीय सैन्य परंपरा और पारिवारिक संस्कारों का अनूठा उदाहरण बन गया. सोशल मीडिया पर भी इस पल की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इसे भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की मिसाल बता रहे हैं.
सेना प्रमुख बनने के बाद क्या बोले जनरल धीरज सेठ?
कार्यभार संभालने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका फोकस ‘VIJAY’ पर रहेगा. उन्होंने कहा कि उनका आदर्श वाक्य ‘जय से विजय’ है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना हर चुनौती का मजबूती से सामना करेगी और देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी. उन्होंने कहा कि सेना लगातार आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है. सीमाओं पर बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए सेना को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा.
जनरल सेठ ने यह भी संकेत दिया कि ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और सैनिकों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. उनका संदेश साफ था कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी.
जनरल धीरज सेठ के सामने कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां हैं?
जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में भारतीय सेना की कमान संभाल रहे हैं, जब देश की लगभग 13 लाख सैनिकों वाली सेना कई मोर्चों पर नई चुनौतियों का सामना कर रही है. पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सुरक्षा स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है. ऐसे समय में सेना को आधुनिक हथियारों, नई तकनीक और स्वदेशी रक्षा उपकरणों से लैस करना बड़ी जिम्मेदारी होगी. भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को तेजी से अपना रही है. इसके अलावा ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क आधारित युद्ध जैसी आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप सेना को तैयार करना भी नए सेना प्रमुख की अहम जिम्मेदारी होगी.
इसके साथ ही सैनिकों की युद्ध क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत करने और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सेना का आधुनिकीकरण भी उनके नेतृत्व की बड़ी परीक्षा होगी.
क्यों खास है जनरल धीरज सेठ का सैन्य सफर?
जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर करीब चार दशक का रहा है और उन्होंने भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं. उनके नाम पश्चिमी मोर्चे पर सेना की दो महत्वपूर्ण अभियानगत सैन्य कमानों का नेतृत्व करने का अनुभव दर्ज है. यही अनुभव उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य पद तक लेकर आया. सैन्य रणनीति, ऑपरेशनल प्लानिंग और सीमावर्ती क्षेत्रों में नेतृत्व के कारण उन्हें एक अनुभवी अधिकारी माना जाता है. अब भारतीय सेना की कमान उनके हाथों में है और उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे सेना के आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और भविष्य की सुरक्षा रणनीति को नई दिशा देंगे.
हालांकि, कार्यभार संभालने के पहले ही दिन जिस तरह उन्होंने अपने पिता को सलामी देकर और उनके चरण छूकर सम्मान दिया, उसने यह भी दिखा दिया कि बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने अपने संस्कारों को सबसे ऊपर रखा. यही वजह है कि उनका यह पहला सार्वजनिक संदेश और व्यवहार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
Bureau Report
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