स्मार्टफोन पर बार-बार इंटरनेट स्लो हो जा रहा हो या 4K वीडियो बफर कर रहा हो, तो अब बहु ही जल्द आपको एक सुपरफास्ट ऑप्शन मिल सकता है, लेकिन इसके लिए आपको कुछ ज्यादा ही जेब ढीली करनी होगी! भारतीय टेलीकॉम मार्केट में अब 5G का वो दौर शुरू होने जा रहा है जहां हर किसी के लिए इंटरनेट की रफ्तार एक जैसी नहीं रहेगी. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी TRAI के नए ड्राफ्ट नियमों ने Jio और Airtel जैसे ऑपरेटर्स के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग का रास्ता साफ कर दिया है. यानी अगर आपको VIP नेटवर्क और गारंटीड हाई-स्पीड इंटरनेट चाहिए, तो कंपनियां आपसे प्रीमियम चार्ज ले सकती हैं.
आखिर क्या है यह नेटवर्क स्लाइसिंग का खेल, और क्या बिना एक्स्ट्रा पैसे दिए आपका 5G स्लो हो जाएगा? आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब.
TRAI के नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, Reliance Jio और Airtel जैसी टेलीकॉम कंपनियां अब प्रीमियम 5G नेटवर्क स्लाइसिंग के लिए यूजर्स से ज्यादा चार्ज वसूल सकती हैं. TRAI के ये नए दिशानिर्देश यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों के नियमों पर आधारित हैं.
क्या है 5G नेटवर्क स्लाइसिंग?
5G स्टैंडअलोन आर्किटेक्चर की सहायता से टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क का एक विशेष हिस्सा यानी स्लाइस अलग से ऑप्टिमाइज कर सकती हैं. यह स्पेशल स्लाइस गेमिंग, हाई-स्पीड स्ट्रीमिंग या दूसरे भारी डेटा वाले कामों के लिए बेहतर परफॉरमेंस और हाई-स्पीड डेटा देता है. हाल ही में एयरटेल ने अपनी प्रायोरिटी सर्विस को फास्ट लेन नाम से रीब्रांड किया था, जिसके बाद नेटवर्क स्लाइसिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई थी.
आम यूजर्स के नेटवर्क पर नहीं पड़ेगा असर
TRAI ने अपने ड्राफ्ट नियमों में साफ किया है कि कंपनियां प्रीमियम यूजर्स को बेहतर 5G स्लाइस दे सकती हैं, लेकिन इसकी वजह से नॉर्मल प्लान इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के सर्विस एक्सपीरियंस में कोई कमी नहीं आनी चाहिए. अगर स्पेशल सर्विस के चक्कर में नार्मल यूजर्स का नेटवर्क खराब होता है, तो टेलीकॉम कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.
4G और 5G के लिए अलग-अलग वसूल सकेंगे पैसे
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम ऑपरेटर अब कस्टमर्स से 4G और 5G सर्विस के लिए अलग-अलग टैरिफ चार्ज कर सकते हैं. अब तक भारतीय टेलीकॉम कंपनियों ने 5G या नेटवर्क स्लाइसिंग के लिए सीधे तौर पर कोई अलग से एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लिया है, बल्कि उन्होंने 5G एक्सेस को केवल 2GB/दिन या उससे ऊपर के प्रीपेड और पोस्टपेड प्लान्स तक ही सीमित रखा था.
ऑपरेटरों को TRAI को देनी होगी रिपोर्ट
नेटवर्क की क्वालिटी बरकरार रहे, इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को यह खुलासा करना होगा कि वे अलग-अलग नेटवर्क स्लाइस के लिए रेडियो नेटवर्क सेल में कितनी कैपेसिटी यानी क्षमता दे रही हैं. कंपनियों को यह जानकारी शेयर करने का नियम अक्टूबर 2026 से लागू होगा.
Bureau Report
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