‘तहलका’ के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. न्यायालय ने यौन उत्पीड़न मामले में उसे दोषी ठहराया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें उन्हें बरी किया गया था.
दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने साल 2023 के एक रेप के मामल में तहलका पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दोषी माना है. इससे पहले गोवा की ट्रायल कोर्ट ने साल 2021 में फैसला देते हुए उन्हें बरी किया था.
‘पीड़िता को वास्तव में मिला न्याय’
गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने बताया कि यह फैसला असल में बहुत अच्छा है. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का आदेश देकर पूरी तरह से गलती की थी. घटना और हालात के बारे में रिकॉर्ड पर बहुत सारे सबूत मौजूद थे. तथ्य बिना किसी शक के साबित हो गए थे. इसके बावजूद, ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के चरित्र के बारे में कुछ धारणाओं और टिप्पणियों के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया.
उन्होंने कहा कि असल में, ट्रायल कोर्ट के पूरे फ़ैसले के दौरान पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाए गए. पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे वही आरोपी हो. हम उस फैसले से सचमुच हैरान थे. हाई कोर्ट का आज का फैसला पीड़िता के लिए राहत लेकर आया है. यह फैसला न्याय और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर आधारित है. एक राज्य के तौर पर, हम बहुत खुश हैं कि हम उस लड़की को न्याय दिला पाए हैं, जिसके साथ उसके अपने ही एम्प्लॉयर ने गलत किया था. कोर्ट के सामने पेश किए गए सबूत एक पूरी टीम की कोशिशों का नतीजा थे.
गोवा पुलिस ने क्या कहा?
तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामले में जांच अधिकारी रहीं, गोवा पुलिस की सुनीता सावंत ने कहा कि मामले की जांच ठीक से की गई थी. जांच के दौरान सामने आई सभी बातें कोर्ट के सामने रखी गईं. एक समय ऐसा आया जब ट्रायल कोर्ट सबूतों को समझने में पीछे रह गया था. हाई कोर्ट के सामने हर बात पर बहस हुई. हाई कोर्ट ने बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया है.
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि यह पूरा मामला पूर्व कनिष्क सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है. इसमें आरोप लगाया गया कि नवंबर 2013 में गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया. मामले की शिकायत के बाद सुनवाई निचली अदालत में चली, जहां से तेजपाल को बरी कर दिया गया.
अदालत के इस फैसले को गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. पिछले हफ्ते इस मामले पर सुनवाई पूरी करते हुए उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था. सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा. मेहता की ओर से बताया गया कि सत्र अदालत ने एक यौन उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं का आकलन करते हुए गलती की.
Bureau Report
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