भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर बुधवार (19 अगस्त 2026) को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर कश्मीर पहुंच रहे हैं. इस साल जनवरी में पदभार संभालने के बाद जम्मू-कश्मीर की यह उनकी पहली यात्रा है.
सूत्रों के मुताबिक गोर दोपहर श्रीनगर पहुंचने वाले हैं. यात्रा के दौरान वे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अलग-अलग मुलाकात करेंगे. गुरुवार को लद्दाख रवाना होने से पहले वे घाटी में ही रात बिताएंगे. उनकी यात्रा को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को खास रूप दिया जा रहा है.
पहली बार कश्मीर की यात्रा करेंगे गोर
बता दें कि 14 जनवरी 2026 को भारत के 27वें अमेरिकी राजदूत के रूप में औपचारिक रूप से पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला ऐसा दौरा है. केंद्र शासित प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से बैठकों की उम्मीद है, लेकिन राजनीतिक नेताओं, व्यापारिक संगठनों, नागरिक समाज या सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकातों की कोई आधिकारिक जानकारी अभी नहीं दी गई है.
क्यों अहम मानी जा रही गोर की यह यात्रा
2019 के संवैधानिक बदलावों और उसके बाद चुनी हुई सरकार की बहाली के बाद जम्मू-कश्मीर के बदले राजनीतिक-प्रशासनिक माहौल में हो रही यह यात्रा कूटनीतिक हलकों में खास ध्यान खींच रही है. यह भारत-अमेरिका संबंधों के लगातार मजबूत होने और दक्षिण व मध्य एशिया में वाशिंगटन के व्यापक रणनीतिक हितों को भी दर्शाती है. अधिकारियों ने अभी तक यात्रा का पूरा कार्यक्रम या मुलाकातों की विस्तृत सूची जारी नहीं की है. राजदूत के श्रीनगर पहुंचने के बाद और जानकारी आने की उम्मीद है.
गोर की यात्रा पर उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की यात्रा पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत कभी नहीं रही. हमारे मुद्दों का समाधान वाशिंगटन नहीं करेगा, बल्कि हमारी केंद्र सरकार को करना है.
उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के राजदूत से अपने ही देश के बारे में शिकायत करना मेरे लिए बहुत गलत होगा. यह मेरी आदत नहीं है. मैं निश्चित रूप से जम्मू-कश्मीर और हमारी स्थिति के बारे में बात करूंगा, लेकिन न तो शिकायत करूंगा और न ही उनसे समाधान खोजने की कोशिश करूंगा.
गोर की यात्रा चीन के लिए संदेश
सर्जियो गोर का का लद्दाख दौरा चीन के लिए भारत का एक सीधा संदेश है. साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव रहा है. इसी बीच अमेरिकी राजदूत का लद्दाख की यात्रा करना अपने आप में अहम है. खास है कि इससे पहले भी अमेरिका ने LAC पर यथास्थिति को बदलने की कोशिशों का विरोध किया है. ऐसे में गोर का लद्दाख जाना भारत और अमेरिका की रणनीति साझेदारी की दर्शाता है.
पाकिस्तान की रणनीति धड़ाम
सर्जियो गोर की यात्रा न केवल चीन के लिए एक संदेश है, बल्कि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की रणनीति को भी बड़ा झटका देने वाला है. पहले कई मौकों पर पाकिस्तान की ओर से कोशिश की गई है कि कश्मीर के मुद्दे पर अमेरिका का ध्यान जाए. कई बार तो अमेरिकी सांसद जम्मू-कश्मीर का दौरा करके तनाव जरूर बढ़ा देते हैं और इस मामले को वैश्विक स्तर पर ले जाने की कोशिश करते हैं.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी राजनयिक अक्सर कश्मीर की यात्रा करना पसंद करते हैं. हालांकि, गोर का दौरा कई मायनों में खास माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनका पद और प्रोफाइल काफी हाईफाई है.
गोर की यात्रा को देखते हुए पूरे श्रीनगर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. कुछ जगहों पर चेकपोस्ट बनाए गए हैं, जिससे यह सुनिश्चिक किया जा सके कि दौरान शांतिपूर्ण ढंग के साथ बिना की परेशानी के पूरा हो सके. अधिकारियों का कहना है कि बैठकों की व्यवस्था को देखने के लिए अमेरिकी दूतावास की एक टीम पहले से मौजूद है.
6 साल पहले कश्मीर गए थे अमेरिकी राजदूत
इससे पहले भारत में अमेरिका का कोई राजदूत 2020 में कश्मीर पहुंचा था. उस वक्त अमेरिका के तत्कालीन राजदूत विदेशी दूतों के 15 सदस्यीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे. धारा 370 के हटने के बाद भारत सरकार की ओर से इस प्रतिनिधि मंडल को जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए श्रीनगर लाया गया था.
Bureau Report
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