तेलंगाना के नालगोंडा जिले से मानवता शर्मसार करने वाला मामला सामने आया था, जहां पर एक स्कूल की प्रिसिंपल का शव उसके ही फ्लैट पर मिला था. इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी थी. इस हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है. पुलिस ने प्रकरण को सुलझाते हुए दो छात्रों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन दोनों छात्रों ने ही कथित तौर पर पैसे और आलीशान जीवन शैली के लिए अपराध की योजना बनाई थी.
दरअसल, कोंडमल्लेपल्ली स्थित नागार्जुन पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या कल्लू रूपा रेड्डी की शव अपने घर में मिला था. पुलिस ने पाया कि उनके शरीर पर कम से कम 27 बारत चाकू से हमला किया गया था. घटना के वक्त उनके पति घर पर नहीं थे. जब उन्होंने कई बार अपनी पत्नी के फोन पर कॉल किया, तो जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने पड़ोसियों को बताया, जिसके बाद घटना की जानकारी सामने आई.
पड़ोसियों ने पुलिस को दी जानकारी
पड़ोसियों ने पूरे घटना की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने पाया कि मृतका के शरीर पर 27 बार चाकू से वार किया गया. मामले की जांच के लिए पांच टीमें बनाईं और सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य, फिंगरप्रिंट, टेक्नीकल डेटा और संदिग्धों की गतिविधियों की जांच की. इस दौरान 80 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई.
छात्रों ने क्यों कर दी अपने ही शिक्षक की हत्या
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को सुराग तब मिला, जब उन्हें पता चला कि फोन बंद होने से पहले रूपा रेड्डी ने अपनी चाची से फोन पर बात करते समय ‘बाबू’ शब्द का इस्तेमाल किया था. बुधवार को सीनियर पुलिस अधिकारी शरथ चंद्र पवार ने बताया कि उसकी बातचीत के दौरान रिकॉर्ड किया गया आखिरी शब्द ‘बाबू’ था. हमने इस बात की जांच की कि वह किसका जिक्र कर रही थी और इससे हमें स्कूल के छात्रों की ओर संकेत मिला.
कैसे हत्यारों तक पहुंची पुलिस?
इसके बाद पुलिस ने छात्रों से व्यक्तिगत रूप से पूछताछ की और कक्षा 10 के उन पांच छात्रों पर फोकस किया, जो घटना वाले दिन स्कूल नहीं आए थे. पुलिस ने इस दौरान पाया कि इनमें से दो छात्र पिछले कुछ समय में खूब पार्टियां कर रहे थे और पैसे खर्च कर रहे थे.
पवार ने कहा कि उन दोनों छात्रों को बुधवार को हिरासत में लिया गया. पूछताछ के दौरान छात्रों ने कबूल किया कि उन्होंने ही एक योजना के अनुसार रूपा रेड्डी की हत्या की थी.
क्यों प्रधानाचार्य को उतारा मौत के घाट
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को कुछ दिन पहले प्रिंसिपल ने फटकार लगाई थी, जब उनके छात्रावास के बैग से कुछ नकदी और मोबाइल फोन मिला था. इसके बाद प्रिंसिपल ने छात्रों के माता-पिता को सूचित किया और उन्हें हॉस्टल से निकाल दिया गया. पुलिस को संदेह है कि इससे प्रधानाचार्य के प्रति असंतोष पैदा हुआ है और छात्रों ने यह कदम उठाया.
दस्ताने खरीद कर छिपाई पहचान
छात्रावास ने निष्कासित होने के बाद छात्रों ने पांच दिनों तक चोरी की योजना बनाई. बाद में उन्होंने अपने प्रिंसिपल के घर की रेकी की. सबसे खास बात है इन छात्रों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए दस्ताने खरीदे, जिससे पुलिस को जांच के दौरान साक्ष्य न मिल सके. जिस दिन हत्या हुई, उस दिन एक छात्र बंदर टोपी और दस्ताने पहने हुए घर में घुसा. छात्र ने शयनकक्ष में रखे 25 लाख रुपये देखा और लेकर भागने लगा.
हालांकि, बंदर टोपी फिसल गई और रूपा रेड्डी ने उसे पहचान लिया. उसे डर था कि वह उन्हें पहचान लेगी,इसलिए उसने अपनी प्रिंसिपल पर चाकू से 27 बार वार किया. हत्या के बाद आरोपियों ने नकदी ली और खून से सने कपड़े और टोपी को दफनाकर सबूत को मिटाने की कोशिश की. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया वह गोवा की यात्रा पर गए थे.
पुलिस ने नकदी बरामद की
गौरतलब है कि पुलिस ने आरोपियों से करीब 1.54 लाख रुपये नकदी बरामद की है, जिसमें खून के धब्बे लगे कुछ नोट, आरोपियों की ओर से खींचा गया आईफोन और रूपा रेड्डी का फोन शामिल है. आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस आगे की जांच में जुट गई है.
Bureau Report
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