पिछले साल लाल किले के पास हुए बम धमाके में नए राज सामने आए हैं. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि इस अटैक के हमलावर डॉ. उमर उन नबी ने धमाका करने के लिए अपने जूते में लगी एक पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट से कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया था. इस तरह यह असल में ‘पैर या जूते’ से चलने वाला बम बन गया था.
एजेंसी की इस खोज से यह शक दूर हो गया है कि कहीं नबी के घबरा जाने की वजह से बम गलती से तो नहीं फट गया था. इससे यह भी साबित होता है कि इसे जान-बूझकर लाल किले पर ही धमाका करने के लिए एक्टिवेट किया गया था, जिसे वह ग्रुप भारतीय सत्ता का प्रतीक मानता था.
इस साल मई में, NIA ने बम धमाके के मामले में 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन दिल्ली की एक अदालत ने 29 अगस्त को ही इसका संज्ञान लिया था. इस हमले में नबी समेत 12 लोग मारे गए, 29 घायल हुए और 24 गाड़ियां तबाह हो गईं. यह धमाका ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGuH) से जुड़े डॉक्टरों के एक ग्रुप ने किया था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) से जुड़ा संगठन है.
जूते से कैसे दिया धमाके को अंजाम?
इस बारे में NIA की चार्जशीट में बताया गया है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह पक्के तौर पर साबित हुआ है कि धमाके में गाड़ी में रखे IED का इस्तेमाल किया गया था. धमाके वाली जगह से ‘रेड-टेप’ ब्रांड का एक जूता जब्त किया गया था, जिसके सिर्फ एक जूते की एड़ी में मेटल का टुकड़ा लगा हुआ था. इससे पता चलता है कि IED को कंट्रोल करने के लिए कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया गया था.’
चार्जशीट में कहा गया, ‘नाक से लिए गए स्वैब की जांच में TATP (ट्राई-एसीटोन ट्राई-पेरोक्साइड) और अमोनियम नाइट्रेट होने का पता चला. इससे पता चलता है कि धमाके के समय नबी कार के अंदर था और उसने ही कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके IED को एक्टिवेट किया था.’
ट्रांसड्यूसर तकनीक से बनाया था बम
IED को सह-आरोपी और बम एक्सपर्ट जासिर बिलाल वानी ने ट्रांसड्यूसर तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया था. NIA ने चार्जशीट में बताया है कि इसमें एक पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट खास सिरेमिक मटेरियल का इस्तेमाल करके मैकेनिकल एनर्जी (दबाव/कंपन) को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में (या इसके उलट) बदलती है. जब इसे दबाया जाता है, तो यह वोल्टेज पैदा करती है. जब वोल्टेज दिया जाता है, तो यह कंपन करती है या अपना आकार बदलती है और एक एक्चुएटर या ट्रांसड्यूसर की तरह काम करती है, जो एनर्जी के एक रूप को दूसरे रूप में बदलता है.
NIA का दावा है कि यह साबित हो चुका है कि वानी ने पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट नबी को सौंपी थी. धमाके वाली जगह पर नबी के जूते से इसके मिलने और विस्फोटक विशेषज्ञों की ओर से इसके विश्लेषण से यह नतीजा निकला कि नबी ने विस्फोटक सामग्री से भरी हुंडई i20 कार में धमाका करने के लिए इसी ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया था.’
लाल किला पर ही हमला क्यों?
NIA की चार्जशीट से पता चलता है कि नबी लाल किले के इलाके को अच्छी तरह जानता था और कई बार वहां जा चुका था. एजेंसी ने दिसंबर 2023 और मई 2025 के बीच 12 ऐसे मौकों का जिक्र किया है, जब नबी, या तो अकेले या डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शहीद सईद के साथ, उस इलाके में गया था. इसके अलावा, उन्होंने लाल किले के इलाके से IED के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान भी खरीदा था.
चार्जशीट में आगे कहा गया, ‘आरोपियों का मानना था कि लाल किला भारतीय राज्य का प्रतीक है और अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नबी के ठिकाने से जब्त किए गए हाथ से लिखे नोटों में साफ तौर पर कहा गया था कि AGuH के सदस्य लोकतंत्र के विरोधी थे और भारत में शरिया कानून लागू करना चाहते थे. इसलिए, लाल किले के पास धमाका करना न सिर्फ एक आतंकवादी हरकत है, बल्कि मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ने जैसा भी है. इसी नजरिए से, वे कई बार लाल किले के आसपास के इलाकों में गए थे.’
क्या कोई और सुसाइड बॉम्बिंग करने वाला था?
NIA की चार्जशीट से पता चलता है कि नबी और AGuH के गिरफ्तार सदस्य मुजम्मिल शकील हमेशा ऐसे लोगों की तलाश में रहते थे, जिन्हें वे अपने ग्रुप को मजबूत करने के लिए कट्टरपंथी बना सकें. नबी, शकील और सईद ने इस मकसद को पूरा करने के लिए छात्रों और साथी डॉक्टरों में से संभावित लोगों को भी निशाना बनाया.
एजेंसी ने बताया कि नबी ने सह-आरोपी जासिर बिलाल वानी और शोपियां के रहने वाले यासिर अहमद डार (जिसे दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था) को आतंकी ग्रुप में शामिल होने के लिए राजी किया. चार्जशीट में कहा गया, ‘वानी और डार को भी नबी और इरफान अहमद वागे (गिरफ्तार विचारक) ने सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए प्रेरित किया था.’
नवंबर 2024 में, नबी ने डार को श्रीनगर के इकबाल पार्क बुलाया और वागे के साथ उससे मुलाकात की. दोनों ने डार को और ज्यादा कट्टरपंथी बनाया और नबी ने उसे ’45’ कोड-नाम दिया. शकील ने भी पुलवामा में डार से मुलाकात की और उसे भरोसा दिलाया कि जब वक्त आएगा, तो उसे इस्लाम के लिए बुलाया जाएगा. मई-जून 2025 में, नबी और वागे ने फिदायीन वाले ऑपरेशन की शपथ दिलाई, जिसे वागे के मोबाइल में रिकॉर्ड किया गया था.’
Bureau Report
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