हवाई जहाज में सफर के दौरान घर का खाना साथ ले जाना कोई नई बात नहीं है. कई लोग लंबी यात्रा में अपने साथ सैंडविच, फल या हल्का स्नैक लेकर चलते हैं. लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग था. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक परिवार ने प्लेन के अंदर बाकायदा खाने की प्लेटें निकाल लीं.
एक महिला परिवार के लोगों को खाना परोसती नजर आईं और कुछ ही देर में सीटों के आसपास का माहौल किसी छोटी पारिवारिक दावत जैसा दिखाई देने लगा. वीडियो में समोसे, ढोकले, थेपले, नमकीन और अलग-अलग तरह की चटनी या खाने की चीजें दिखाई देती हैं. कुछ लोग प्लेट लेकर खाना खाते हैं, जबकि परिवार की कुछ लड़कियां इसी दौरान प्रेस-ऑन नेल्स लगाती भी नजर आती हैं.
प्लेट लेकर केबिन में घूमते दिखे लोग
वीडियो का एक हिस्सा सोशल मीडिया यूजर्स के बीच खूब शेयर किया जा रहा है. इसमें परिवार के कुछ सदस्य खाना लेकर प्लेन के अंदर इधर-उधर जाते दिखाई दे रहे हैं. यही वजह है कि कई लोगों ने सवाल उठाया कि यह प्लेन है, कोई ट्रेन या घर का कमरा नहीं है. यहां अलग-अलग लोगों को एक साथ बैठकर सफर करना होता है और छोटी सी हरकत भी दूसरे यात्रियों को परेशान कर सकती है. हालांकि, वीडियो में परिवार की तरफ से जानबूझकर कोई हंगामा करते हुए नहीं दिखाया गया. यही बात इस पूरे मामले को लेकर चल रही बहस को थोड़ा अलग बनाती है.
खाना खत्म किया तो कचरा भी समेटा
परिवार की तरफ से एक बात ऐसी भी की गई, जिसकी कुछ लोग तारीफ कर रहे हैं. खाना खाने के बाद इस्तेमाल की गई प्लेटें और बाकी कचरा सीटों के आसपास छोड़ने के बजाय एक बड़े बैग में जमा किया गया. वीडियो में वही महिला दिखाई देती हैं, जो खाना परोस रही थीं. वह इस्तेमाल की गई प्लेटें और दूसरे सामान को इकट्ठा करके बैग में रखती नजर आती हैं. बाद में वीडियो पोस्ट करने वाली येश्वी ने भी सफाई दी कि परिवार ने करीब 20 मिनट में खाना खत्म कर लिया था. उनका कहना था कि सभी लोग शांत बैठे थे, रास्ता भी खाली रखा गया था और खाना खत्म होने के बाद उनकी मां ने घूमकर कचरा इकट्ठा किया.
‘अपना खाना लाना गलत नहीं, लेकिन…’
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया. एक तरफ कुछ लोगों ने कहा कि घर का खाना साथ लेकर चलना गलत नहीं है. दूसरी तरफ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या प्लेन के अंदर इतने लोगों के लिए खाना निकालकर परोसना सही तरीका है. एक यूजर ने लिखा कि एक सैंडविच या चिप्स का पैकेट समझ में आता है, लेकिन यहां तो पूरा बुफे खोल दिया गया. एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि घरेलू उड़ानों की यात्रा आम तौर पर बहुत लंबी नहीं होती, तो आखिर प्लेन के अंदर इतनी बड़ी दावत की जरूरत क्यों पड़ी. कुछ लोगों ने खाने की गंध को लेकर भी चिंता जताई. प्लेन का केबिन बंद होता है और अगर किसी यात्री को किसी खास खाने की गंध पसंद न हो या उससे परेशानी हो, तो उसके लिए पूरी यात्रा मुश्किल हो सकती है.
क्या फ्लाइट में बाहर का खाना ले जाना मना है?
यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. IndiGo की अपनी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, यात्री प्लेन में कुछ तरह का खाना लेकर जा सकते हैं. इसमें ठंडे स्नैक्स, गैर-मादक पेय, स्नैक बार और बिस्किट जैसी चीजें शामिल हैं. लेकिन एयरलाइन ने यह भी साफ किया है कि बहुत ज्यादा गंदगी फैलाने वाला, तेल वाला या तेज गंध वाला खाना विमान में ले जाने की अनुमति नहीं है. इसलिए सिर्फ घर से खाना लेकर आने को देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि परिवार ने कोई नियम तोड़ा. असली सवाल यह है कि प्लेन के अंदर उसे किस तरीके से खाया और परोसा गया.
क्या IndiGo ने कोई कार्रवाई की?
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने एयरलाइन से कार्रवाई की मांग भी की. एक यूजर ने तो परिवार को नो-फ्लाई लिस्ट में डालने तक की बात कह दी. लेकिन अब तक उपलब्ध रिपोर्टों में IndiGo की तरफ से परिवार पर किसी जुर्माने, बैन या नो-फ्लाई लिस्ट में डालने की पुष्टि नहीं हुई है. वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जरूर हुई, लेकिन किसी आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है. यह भी ध्यान देने वाली बात है कि वीडियो में पोस्ट करने वाली येश्वी के मुताबिक, एयरलाइन स्टाफ ने उन्हें खाना खाने से नहीं रोका और परिवार ने भी रास्ता खाली रखने की कोशिश की.
असली सवाल खाना नहीं, तरीका है
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यही है कि बहस सिर्फ समोसे, ढोकले या थेपले पर नहीं है. सवाल यह है कि सार्वजनिक जगह पर अपनी सुविधा और दूसरे लोगों की सुविधा के बीच संतुलन कैसे रखा जाए. घर का खाना खाना भारतीय परिवारों के लिए भावनाओं से जुड़ा हो सकता है. यात्रा के दौरान साथ बैठकर खाना परिवार के लिए यादगार पल भी बन सकता है. लेकिन विमान में आसपास बैठे यात्रियों की सुविधा और केबिन के नियमों का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है.
‘दावत’ पर बंटी लोगों की राय
कुछ लोगों को वीडियो देखकर परिवार का मिल-जुलकर खाना बिल्कुल सामान्य लगा. उनका कहना था कि अगर किसी को परेशान नहीं किया गया और कचरा भी साफ कर दिया गया, तो इसे इतना बड़ा मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है. वहीं आलोचना करने वालों का तर्क है कि सार्वजनिक जगह पर सिर्फ कचरा साफ कर देना काफी नहीं है. खाना परोसने के लिए बार-बार सीट से उठना, केबिन में प्लेट लेकर घूमना और तेज गंध वाला खाना खोलना दूसरे यात्रियों के लिए परेशानी बन सकता है. मतलब सोशल मीडिया पर चल रही बहस का जवाब शायद ‘घर का खाना अच्छा है या बुरा’ में नहीं है. असली बात यह है कि आप कहीं भी हों, आपकी आजादी वहीं तक है जहां से दूसरे व्यक्ति की सुविधा शुरू होती है.
Bureau Report
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