ये बस मुलाकात नहीं, आगे की बात है… ब्रिक्स की अब तक की सबसे ताकतवर तस्वीर का अर्थशास्त्र समझिए, मोदी के पावरवॉक से ट्रंप परेशान

ये बस मुलाकात नहीं, आगे की बात है... ब्रिक्स की अब तक की सबसे ताकतवर तस्वीर का अर्थशास्त्र समझिए, मोदी के पावरवॉक से ट्रंप परेशान

8वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, युद्ध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भारत में हैं. ब्रिक्स के सदस्य देशों और पार्टनर देशों के सदस्य दिल्ली में आयोजित 2 दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आ चुके हैं. 12-13 सितंबर को ब्रिक्स समिट की बैठकें दिल्ली के भारत मंडपम में हो रही है. इससे पहले 11 सितंबर को रूसी राष्ट्रपति पुतिन, पीएम मोदी, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने बिजनेस फोरम समिट में शामिल हुए. इस दौरान तीनों नेताओं के बीच गजब की केमेस्ट्री दिखी. इस दौरान पुतिन, मोदी और पेजेश्कियान की एक फोटो ने हिस्ट्री बना दी, जिसको समझना जरूरी है.

इस तस्वीर पर गौर करना चाहिए


ब्रिक्स समिट के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जो अमेरिका और यूरोप को, तो चुभेगी, लेकिन इस तस्वीर ने बड़ा संदेश दे दिया. भारत के ग्लोबल लीडर के तौर पर बन रही तस्वीर पर मुहर लगा दी है. ये तस्वीर ब्रिक्स 2026 के ऑफिशियल बैकड्रॉप के सामने खींची गई वो तस्वीर हैं, जिसने सोशल और इंटरनेशनल मीडिया का ध्यान खींचा है. 

क्या है इस तस्वीर में…

इस फोटो में पीएम मोदी के एक हाथ में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का हाथ है. दूसरी तरफ साथ में राष्ट्रपति पुतिन हैं. प्रधानमंत्री के चेहरे पर मुस्कान और हाथों की गर्मजोशी को आसानी से देखा जा सकता है. जिस तरह से पीएम मोदी के एक ओर पेजेशकियान और दूसरी ओर पुतिन है और साथ में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा कंधे से कंधा मिलाकर चलते दिख रहे हैं, वो सिर्फ ब्रिक्स देशों के दोस्ताने की कहानी बयां नहीं करता, बल्कि ब्रिक्स पावर को पूरी बैलेंसशीट दिखाता है, जिसकी चर्चा बाद में पुतिन और पीएम मोदी ने दोनों बिजनेस फोरम को संबोधित करते के दौरान किया. 

तस्वीर की ताकत को समझिए

डिप्लोमेसी में कुछ भी अनायास नहीं होता. बॉडी लैंग्वेज का बहुत बड़ा मतलब होता है. इस तस्वीर में ईरान और रूस के राष्ट्रपति का हाथ थामकर पीएम मोदी का चलना ये दिखाता है कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच कैसे ब्रिक्स देशों के साथ निडर होकर खड़ा है. ये सिर्फ पर्सनल केमेस्ट्री नहीं है, बल्कि भारत की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था की ताकत , ग्लोबल लीडर की छवि को दर्शाता है . ये तस्वीर ब्रिक्स देशों के प्रति भारत के भरोसे, उसकी दोस्ती को दिखाता है कि हर स्थिति में वो दोस्त देशों के साथ खड़ा है. 

ब्रिक्स बनाम अमेरिका के बीच पीएम मोदी का पावरफुल वॉक   

अमेरिका की ब्रिक्स को लेकर खीज किसी से छिपी नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे लेकर कई बार धमकियां दे चुके हैं. वो G7 के लिए, अमेरिकी डॉलर के लिए ब्रिक्स को खतरा मानते हैं. उन्होंने तो खुलेआम इसे अमेरिका विरोधी बता दिया और 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है.  रूस और ईरान पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं. खुद पुतिन ने बताया कि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर 35 हजार से अधिक प्रतिबंध लगाए है. ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका ने उसे अलग-थलग कर रखा है, उसपर आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगे हैं.  इस बीच दोनों नेताओं के साथ पीएम मोदी का पावर वॉक वॉशिंगटन और ट्रंप को झटका देने वाला है.  इस तस्वीर पर एक्सपर्ट CA मुकेश जैन कहते हैं…

अब इस तस्वीर का अर्थशास्त्र समझिए  

पहले ईरान की बात करते हैं, फिलहाल ये देश युद्ध की मार झेल रहा है. अमेरिका के साथ युद्ध के बाद से इसकी अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात प्रतिबंध झेल रही है. हालांकि इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका तेल और गैस भंडार है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के दम पर अमेरिका जैसे सुपरपावर को झुका रखा है.  

ईरान दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा संपन्न देशों में से एक है, जहां दुनिया के कुल तेल भंडार का 10% और 15% नेचुरल गैस का भंडार है.  

ईरान के पास लगभग 208 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है. 

खाड़ी देशों की इकोनॉमी जहां कमोडिटी पर टिकी है, वहीं ईरान की अर्थव्यवस्था कमोडिटी के अलावा कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बंटी है.  ईरान के पास बड़ी, युवा और शिक्षित  वर्कफोर्स की मौजूदगी है. 

भारत-ईरान के बीच संबंध, व्यापार  और मजबूत होते रिश्ते की कहानी

अमेरिकी प्रतिबंधों और युद्ध के चलते भारत और ईरान के बीच व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में सिर्फ 1.63 अरब डॉलर का रह गया है, जो  2018-19 में लगभग 17 अरब डॉलर था. हालांकि दोनों देशों के बीच राजनीतिक रिश्तें कई प्रोजेक्ट से जुड़े हैं.जिसमें सबसे जरूरी…

1. चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port): दोनों देशों के बीच चाबहार पोर्ट विकसित किया जा रहा है, जिसके जरिए बिना पाकिस्तान रूट के बारत सीधे अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस के साथ व्यापार कर     सकेगा.  

2. आईएनएसटीसी (INSTC):  7200 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के जरिए भारत सी और रेल रूट के जरिए सीधे रूस से कनेक्ट होगा, जिसमें ईरान का सबसे अहम हिस्सा पड़ता है.  
 

रूस के साथ भारत की रूस का व्यापार और रिश्ता  

भारत और रूस के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक, व्यापारिक, आर्थिक रिश्ते 8 दशक से भी पुराने हैं. भारत और रूस के बीच 60 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जिसे साल 2030 तक 100 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य है.  आयात-निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और डिफेंस का है.  भारत और रूस के बीच रिश्तों पर विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं… 

भारत के साथ तेल और गैस का जैकपॉट  

ईरान के पास तेल का विशाल भंडार है. रूस से सबसे ज्यादा तेल भारत खरीदता है.  सिर्फ इस तस्वीर की ही बात करें, तो भारत अमेरिका की टैरिफ को अगर इग्नोर करें तो तेल की चिंता खत्म हो सकती है. होर्मुज तनाव के बीच ईरान से तेल की आवक शुरू हो जाए, तो ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है. यानी इस तस्वीर में भारत की एनर्जी सिक्योरिटी की झलक दिखती है.  

ट्रंप के टैरिफ का जवाब  

अमेरिका ने अपनी बातों को मनवाने के लिए टैरिफ और प्रतिबंधों को सबसे बड़ा हथियार बनाया है. पीएम मोदी की ब्रिक्स की ये तस्वीर उनकी मनमानी का कड़ा जवाब है. ब्रिक्स देशों की ये फोटो अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों का जवाब देने की क्षमता रखती है. ये संकेत दे रही है कि ब्रिक्स देश अमेरिका को अलग-थलग कर नया वर्ल्ड ऑर्डर बनाने की क्षमता रखते हैं. चाहे ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की वकालत हो. लोकल करेंसी में व्यापार हो, डिजिटल करेंसी और फास्ट पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की बात हो. अमेरिका ब्रिक्स की इन पहलों से अपने सुपरपावर की छवि को खो सकता है.  

Bureau Report

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