ईरान युद्ध की वजह से तेल के दाम 4 बार बढ़ाए जा चुके हैं. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है. जिसकी वजह से देश में महंगाई तेजी से बढ़ रही है. खीने-पीने से लेकर आने-जाना महंगा हो रहा है. पेट्रोल-डीजल, सीएनजी के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने माल ढुलाई से लेकर किराए बढ़ा दिया है . अब तेल की कमाई ATM से पैसा निकालना भी महंगा कर सकती है. महंगे पेट्रोल-डीजल का असर अब ATM से कैश निकालने पर भी दिख सकता है.
ATM पर भी महंगाई की मार
बढ़ती महंगाई और महंगे पेट्रोल-डीजल की मार एटीएम सर्विस पर पड़ने वाली है. एटीएम में कैश डालने वाली कंपनियों ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के सामने अपनी मांग रखी है, जिसमें उन्होंने बढ़ते लॉजिस्टिक्स कॉस्ट का हवाला देते हुए सर्विस चार्ज बढ़ाने की मांग की है. CMS Info Systems, Brink’s India और SIS Prosegur जैसी कंपनियां, जो एटीएम में कैश डालने का काम करती हैं. उन्होंने IBA के सामने सर्विस चार्ज बढ़ाने की मांग की है.
बढ़ रहा है खर्च, एटीएम सर्विस चार्ज बढ़ाने की मांग
कंपनियों का कहना है कि तेल महंगा होने से उनका ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ रहा है. एटीएम में कैश डालने की सर्विस का लागत बढ़ रहा है. पेट्रोल-डीजल महंगा होने के साथ-साथ न्यूनतम लेबर कॉस्ट में भी इजाफा हुआ है, जिसकी वजह से उनके लिए ऑपरेशनल कॉस्ट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन बैंकों की ओर से सर्विस प्राइस में बढ़ोतरी नहीं की गई है. उन्होंने अपनी परेशानी और मांग IBA के चीफ को चिट्ठी लिखकर भेजी है. इंडस्ट्री की सेल्फ-रेगुलेटरी बॉडी, करेंसी साइकिल एसोसिएशन की माने तो इन कंपनियों के लिए एटीएम में कैश डालने का ऑपरेशनल खर्च 15–20 फीसदी तक बढ़ सकता है. उन्होंने मांग की है कि ATM कैश सर्विस बिना किसी रुकावट के जारी हे, इसके लिए उनकी सर्विस की कीमत बढ़ाई जाए.
एटीएम में कैश सर्विस पर संकट
लॉजिस्टिक कंपनियों का कहना है कि तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर कैश वैन की आवाजाही और रूट पर आने वाले खर्चों पर पड़ रहा है. कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी होने से लागत बढ़ रहा है. कंपनियों पर खर्च का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन बैंकों की ओर से चार्ज नहीं बढ़ाए जा रहे हैं. वहीं बैंकों की ओर से कैश सप्लाई में मांग और सप्लाई के बीच के अंतर के चलते उन्हें एटीएम मशीन में कैश भरने के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. करेंसी साइकिल एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल यूएस पालीवाल ने कहा है कि लागत को कम करे के लिए कंपनियां कैश भरने की ट्रिप्स को कम करने का फैसला ले सकती है. ऐसे एटीएम में हफ्ते में दो या तीन बार कैश भरा जा सकता है, जहां कैश की जरूरत कम होती है.
बैंक ग्राहकों पर डाल सकते हैं बोझ
अगर लॉजिस्टिक कंपनियों की डिमांड पर बैंकों ने एटीएम कैश रिफिंग चार्ज में बढ़ोतरी कर दी तो इसका बोझ अंतत ग्राहकों को ही उठाना पड़ेगा. बैंक एटीएम सर्विस चार्ज में बढ़ोतरी कर इसकी भरपाई कर सकती है. यानी आपके लिए एटीएम से कैश निकालने का बोझ बढ़ सकता है.
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